मुखबिर संरक्षण विधेयक को कैबिनेट की मंजूरी (लीड-1)

जनहित में खुलासा (सूचना संरक्षण) विधेयक 2010 को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में मंजूरी दी गई।

इस विधेयक के अनुसार, केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) की यह जिम्मेदारी होगी कि वह सरकारी पद और कोष का दुरुपयोग करने वालों के बारे में सूचना मुहैया कराने वाले नागरिकों की पहचान जाहिर न होने पाए।

सीवीसी के पास उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार होगा जो मुखबिर की पहचान को जाहिर करेंगे या जो मुखबिर को धमकी देंगे। लेकिन झूठी सूचना देने वाले भी दंड के भागी होंगे।

आधिकारिक सूत्रों ने आईएएनएस को बताया कि असामाजिक तत्वों व स्वार्थी लोगों द्वारा मंजूनाथ षणमुगम और सत्येंद्र दूबे जैसे मुखबिरों तथा सूचना का अधिकार से संबंधित कई कार्यकर्ताओं की हत्या किए जाने के बाद सरकार इस विधेयक के लिए बाध्य हुई है।

सूत्रों ने कहा कि नौकरशाहों व राजनीतिज्ञों के भ्रष्टाचार का खुलासा करने वाले कई सामाजिक कार्यकर्ताओं को माफिया तत्वों ने या तो मार डाला है या तो उन्हें धमकी दी है।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), कानपुर के छात्र रहे दूबे की बिहार में इसलिए हत्या कर दी गई थी, क्योंकि उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण में ठेकेदारों के भ्रष्टाचार का खुलासा किया था।

मूल रूप से आंध्र प्रदेश के निवासी षणमुगम भारतीय तेल निगम (आईओसी) में अधिकारी थे। उनकी उत्तर प्रदेश में इसलिए हत्या कर दी गई थी, क्योंकि उन्होंने पेट्रोल पंपों में की जा रही मिलावट का खुलासा किया था। उन्होंने भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम), लखनऊ में पढ़ाई की थी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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