एम्स जैसे 6 नए संस्थान सोसायटी के रूप में पंजीकृत होंगे
मंत्रिमंडल की एक विज्ञप्ति में कहा गया कि हर संस्थान को सोसायटी पंजीकरण कानून, 1860 के तहत एक सोसायटी के रूप में पंजीकृत किया जाएगा। कानूनी तौर पर एक सोसायटी होने से इनको व्यापक स्वायत्तता होगी, परियोजनाओं का तेज क्रियान्वयन होगा और सरकार से कोष का शीघ्र हस्तांतरण होगा।
इन संस्थानों का निर्माण प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (पीएमएसएसवाई) के तहत हो रहा है।
सोसायटी के गठन से इन संस्थानों को एक प्रशासनिक ढांचा उपलब्ध होगा, जो अभी उपलब्ध नहीं है। एम्स जैसे संस्थानों को संसद के एक कानून के अधीन लाने तक ये सोसायटी काम करती रहेंगी।
बयान में कहा गया कि हर सोसायटी में दो स्तरीय सांगठनिक और प्रबंधन ढांचा होगा। स्वास्थ्य मंत्री की अध्यक्षता वाली प्रशासनिक परिषद में संबंधित मंत्रालयों और विभागों का प्रतिनिधित्व होगा। सभी नीतिगत मामलों पर फैसला करने का अधिकार इस सर्वोच्च संस्था को होगा।
इसके साथ ही स्वास्थ्य और परिवार कल्याण सचिवों की अध्यक्षता में एक बोर्ड ऑफ गवर्नर्स का भी गठन होगा। इसमें राज्य सरकारों का भी उचित प्रतिनिधित्व होगा। विज्ञान और चिकित्सा क्षेत्र का विशेष ज्ञान रखने वाले लोगों को भी प्रशासकीय परिषद में स्थान दिया जाएगा।
एम्स जैसे संस्थान बिहार (पटना), छत्तीसगढ़ (रायपुर), मध्य प्रदेश (भोपाल), उड़ीसा (भुवनेश्वर), राजस्थान (जोधपुर) और उत्तराखंड (ऋषिकेश) में बनाए जाने को मार्च 2006 में मंजूरी दी गई थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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