वर्ष के अंत तक भारत, बांग्लादेश करेंगे आपसी सीमाओं का इस्तेमाल
बांग्लादेश की विदेश मंत्री दीपू मोनी ने कहा कि इसका उद्देश्य क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण है। इससे बांग्लादेशी भू-भाग का इस्तेमाल करके भारत अपने पूर्वोत्तर क्षेत्रों में पहुंच बढ़ा सकेगा।
उन्होंने कहा कि जरूरी प्रोटोकॉल या समझौतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है और एक साधारण आदान-प्रदान पत्र इसके लिए पर्याप्त होगा।
भारतीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी की बांग्लादेश की संक्षिप्त यात्रा के बाद मोनी ने मीडिया से कहा, "हम बांग्लादेश को एक क्षेत्रीय केंद्र के रूप में तब्दील करने के बारे में सोच रहे हैं।"
मुखर्जी ने बांग्लादेश को एक अरब डॉलर के ऋण संबंधी समझौते पर हस्ताक्षर किया है। बांग्लादेश द्वारा किसी देश से प्राप्त की जाने वाली यह अब तक की सबसे बड़ी राशि है। साथ ही भारत द्वारा किसी देश को प्रदान की जाने वाली यह सबसे बड़ी राशि है।
मोनी ने कहा, "एक अरब डॉलर का ऋण बांग्लादेश के हितों के लिए लिया गया है लेकिन भारत को भी इससे फायदा होगा। व्यापार के लिए एक-दूसरे के भू-भाग के इस्तेमाल पर सहमति बनने से सभी को फायदा होगा।"
उन्होंने कहा कि लोगों को ऐसी नकारात्मक बातें दिमाग से निकाल देनी चाहिए कि यदि सड़कों और बंदरगाहों का निर्माण होगा तो इससे केवल भारत को ही फायदा होगा।
मोनी ने कहा कि बांग्लादेश क्षेत्रीय और वैश्विक आधार पर लगभग एकाकी राष्ट्र है लेकिन ऐसे दौर में जब दुनिया तेजी से आगे बढ़ रही है और विभिन्न देश आर्थिक विकास के लिए एक-दूसरे से जुड़ रहे हैं तो ऐसे में हम अलग-थलग नहीं रहना चाहते।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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