साइकिल की 'ट्रिन-ट्रिन' सुन बचपन में क्यों लौट जाते हैं हम?
वैज्ञानिकों का दावा है कि जब हम कोई विशेष खुशबू के झोंके से रूबरू होते हैं या फिर हमें कोई विशेष ध्वनि सुनाई देती है तब हम एक विशेष तरह से भावनात्मक अनुभव से गुजरते हैं।
यह खुशबू या फिर ध्वनि हमारे दिमाग के भावनात्मक कक्ष में छुपा होता है, जो पलक झपकते ही सामने आ जाता है और हमें पुराने दिनों की याद दिला जाता है।
तुरीन स्थित 'नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंस' के वैज्ञानिकों ने इस रहस्य को समझने के लिए चूहों को एक ध्वनि, प्रकाश की किरण या फिर विनेगर की सुगंध को पहचानने के लिए प्रशिक्षित किया। प्रशिक्षण के दौरान चूहों को बिजली के झटके दिए गए।
उदाहरण के तौर पर, बिजली के झटकों के दौरान जिन चूहों को प्रकाश की चमक दिखाई गई थी, उन्होंने अपने दिमाग के एक कोने में बिजली के झटके के साथ-साथ प्रकाश के चमक को भी बसा लिया।
इस कारण उन्हें जब भी बिजली के झटके दिए गए, तब-तब उन्हें प्रकाश की चमक की याद आई। यह एक स्वाभाविक प्रक्रिया है और इसका इंसानों पर भी बराबर असर होता है।
इससे साफ है कि हम जब एक अनुभव से गुजरते हैं, तब उस अनुभव से जुड़े दूसरे अनुभव भी हमारे सामने आ जाते हैं। ये अनुभव हमारे दिमाग के भावनात्मक कक्ष में छुपे होते हैं।
यही कारण है कि साइकिल की घंटी की आवाज सुनते ही हमारे जेहन में उस साइकिल की झलक आ जाती है, जिसे हमने पहली बार चलाई थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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