युआन में मजबूती से घटेगा भारत का व्यापार घाटा
उद्योग एवं व्यापार संगठन फिक्की द्वारा किए गए सर्वे में कहा गया है कि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले चीन की मुद्रा युआन में मजबूती आने से भारत के भारी उद्योग और ऊर्जा क्षेत्र और पूरे आयात क्षेत्र को भी लाभ मिलेगा। इससे भारत में निवेश बढ़ेगा और सेवा क्षेत्र के लिए बाजार बढ़ेगा।
इस सर्वे में अर्थशास्त्रियों ने कहा है कि अगले 12 महीनों में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले करीब पांच प्रतिशत की मजबूती आ सकती है।
सर्वे में कहा गया, "अर्थशास्त्रियों का मानना है कि दीर्घकालिक अवधि में सभी विकासशील देशों के साथ भारत को इसका लाभ मिलेगा।"
अर्थशास्त्रियों ने कहा कि चीन को युआन में कम से कम 8-10 प्रतिशत की मजबूती की मंजूरी देनी चाहिए। मुद्रा के मूल्यों में परिवर्तन से अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
जून में चीन ने अपनी मुद्रा को लचीला बनाने की मंजूरी थी इसके बाद यह डॉलर के मुकाबले 0.7 प्रतिशत मजबूत हुई है।
अर्थशात्रियों के मुताबिक चीन का यह कदम वैश्विक अर्थव्यवस्था के सुधार में मदद के लिए नहीं बल्कि घरेलू मांग में वृद्धि करने के लिए है। इससे चीन को अपनी अर्थव्यवस्था के निर्यात आधारित स्वरूप को घरेलू खपत आधारित स्वरूप में परिवर्तित करने में मदद मिलेगी इससे चीन के लिए आयात सस्ते हो जाएंगे।
इसके अलावा चीन को इस कदम से महंगाई से निपटने में भी मदद मिलेगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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