सावन मास का पहला प्रदोष कल

शिव के प्रिय महीने सावन का पहला प्रदोष यानी शनिवार को है।कहते हैं एक तो सावन और ऊपर से प्रदोष यानी वो जरिया जिससे सीधे आप भगवान तक दिल की बात पहुंचा सकते हैं। प्रदोष के दिन आप सुबह से व्रत रहें और गोधूली बेला में भगवान शिव की पूजा करें। जिसके लिए आपको जल और कच्चे दूध की आवश्यकता पडे़गी। बेल पत्र और भांग से भगवान शिव का श्रृंगार करें और दिल और आत्मा यानी सच्चे मन से भगवान की पूजा करें। जिसके बाद ऐपर अपने जीवन में फर्क स्वयं महसूस करेंगें।

सावन मास का पहला प्रदोष कल

यूं तो सावन में पूरा वातावरण ही शिवमय होता है लेकिन प्रदोष की पूजा के लिए मंदिरों में विषेष व्यवस्था की जाती है। शिव की नगरी जैसे काशी, देवघर, माहकाल के द्वार पर सुबह से ही भक्तों का तांता लग जायेगा, शिवालयों में ऊं नम: शिवाय की गूंज सुनाई देने लग जायेगी। बनारस में तो इस दिन के लिए खासी सुरक्षा व्यवस्था कर दी गई है। गंगा घाट से लेकर काशी विश्वनाथ मंदिर तक लोगों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम कर दिये गए हैं ताकि श्रद्धालुओं को कोई तकलीफ न हो।

जय भोले नाथ...

बनारस में आप को शिव दर्शन के आलावा भोलेनाथ की मनोरम झांकिया भी देखने को मिलेगी। इसके अलावा आप गंगा घाट पर शाम 5 से 7 बजे तक गंगा आरती एवं नौका विहार का आनंद भी उठा सकते हैं

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