कराची हिंसा: 76 की मौत
सिंध प्रांत की विधानसभा के सदस्य हैदर की अज्ञात हमलावरों ने सोमवार को निजामाबाद इलाके में एक मस्जिद के बाहर उस समय हत्या कर दी थी जब वह एक जनाजे में शरीक होने गए थे। इस हमले में उनका अंगरक्षक भी मारा गया था।
हिंसक प्रदर्शन
उनकी हत्या के तुरंत बाद कराची, हैदराबाद और सिंध के अन्य शहरों में हिंसा भड़क उठी। प्रदर्शनकारी बंदूकों और हथियारों से लैस होकर सड़कों पर उतर आए तथा वाहनों के साथ ही दर्जनों दुकानों, पेट्रोल पंपों को आग के हवाले कर दिया।
गुरुवार को भी यहां की सड़कें सुनसान नजर आईं और दुकानें बंद रहीं। हाथों में बंदूक थामे प्रदर्शनकारी मोटरसाइकिलों पर सवार होकर पूरे शहर में घूम रहे हैं। कराची के पुलिस प्रमुख वसीम अहमद ने कहा कि तीन दिनों के बाद भी जारी हिंसा में मरने वालों की संख्या 76 हो गई है जबकि 100 लोग घायल हुए हैं, जिन्हें विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।
इतिहास
वर्ष 1947 में पाकिस्तान के बनने के बाद भारत से कराची आए ऊर्दू-भाषी लोगों और पश्चिमोत्तर के खैबर-पख्तूनख्वा प्रांत के पश्तो-भाषी लोगों के बीच यहां जातीय हिंसा का पुराना इतिहास रहा है।
जातीय हिंसा के चलते पिछले दो साल के दौरान यहां 1500 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। एमक्यूएम के नेताओं ने अवामी नेशनल पार्टी (एएनपी) पर इस हत्या में शामिल होने का आरोप लगाया।













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