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सावन की बारिश में नहायी शिवनगरी काशी

सावन आ गया है, और लगता है जैसे शिव की नगरी काशी ने हरे रंग से ब्याह रचा लिया है, आप चारों ओर यहां लोगो को शिव भक्ति में लीन देखेंगे। क्या देशी और क्या विदेशी हर कोई बस आपको हरा ही हरा दिखायी पड़ेगा। मंत्रो और श्लोकों से शुरू हुई बनारस की सुबह बरबस ही अपनी ओर सबको खींच लेती है। जय भोले नाथ के जयकारों से गूंजते शिवालय और उनमें बजते घंटे मानों हर किसी को अपना प्रेमी बना लेते है।

शिवनगरी काशी में लगा भक्तों का मेला

सावन के दिनों में बनारस और भी सुंदर हो जाता है। हर किसी की तमन्ना होती है कि सावन के दिनों में मां गंगा की गोद में डुबकी लगा कर और काशी विश्वनाथ मंदिर में सिर नवा कर अपने सारे पापों का प्रायश्चित कर लें। कहते भी है शिवनगरी काशी से कोई खाली हाथ या भूखा नहीं जाता है तभी तो यहां लाखों की संख्या में कावड़ियें आते हैं जो साल भर केवल सावन का ही इंतजार करते हैं।

बनारस को मोक्ष नगरी भी कहते हैं, पुराणों में बखान है कि यह नगर भगवान शिव की प्रिय नगरी है तभी तो इंसान कहीं भी रहे उसकी कोशिश यही होती कि उसके जीवन का अंतिम क्षण बनारस यानी काशी में हो।

सावन में हरी हो गई काशी

सावन और काशी के बारे में ये भी कहा जाता है जो भक्त यहां सावन में भोलेनाथ को जल चढ़ाता है वो धनवान,विद्यावन और पुत्रवान होता है। उसके वंशज पीढ़ी दर पीढ़ी सफलता के सिंहासन पर रहते है। हमेशा ही अपने भक्तों के कष्टों का निवारण करते हैं भोलेनाथ, इसलिए सावन में आईये काशी, चढ़ाइये जल और पूरी कीजिये अपनी मुरादें और बोलिए जय काशी, जय भोलेनाथ।

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