भारत, रूस, ईरान की तालिबान विरोधी रणनीति
नई दिल्ली, 3 अगस्त (आईएएनएस)। पाकिस्तान द्वारा तालिबान के साथ समझौते की कोशिश और इस्लामाबाद की अफगानिस्तान में भूमिका के संदर्भ में हाल के खुलासे के बाद भारत, ईरान और रूस एकसाथ मिलकर संभवत: 2001 की उस रणनीति पर वापस लौट रहे हैं, जिसके तहत उन्होंने काबुल से तालिबान शासन को उखाड़ फेंकने के लिए उत्तरी गठबंधन के अभियान का समर्थन किया था।
उच्च पदस्थ सूत्रों ने आईएएनएस को बताया कि मास्को में सोमवार को विदेश सचिव निरूपमा राव और रूस के प्रथम उप विदेश मंत्री एंद्रेई देनिसोव के बीच चर्चा के दौरान अफगानिस्तान में तालिबान को पछाड़ने के लिए आपसी समन्वय पर प्रमुखता से चर्चा हुई।
सूत्रों ने कहा कि रूसी पक्ष ने राव को राष्ट्रपति दमित्री मेदवेदेव की इसी महीने आगे चलकर एक त्रिपक्षीय शिखर बैठक आयोजित करने की योजना के बारे में बताया। इस बैठक में पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और अफगानी राष्ट्रपति हामिद करजई हिस्सा लेंगे।
भारत-रूस संबंधों के विशेषज्ञ अरुण मोहंती ने आईएएनएस को बताया, "भारत और रूस एक क्षेत्रीय दृष्टिकोण पर करीब आ रहे हैं और दोनों ने अमेरिकी सेना के अफगानिस्तान छोड़ने के बाद तालिबान को सत्ता पर काबिज होने से रोकने में अपने को साझा किया है।"
सूत्रों ने कहा कि दोनों पक्ष संभवत: एक बैठक में अपनी रणनीतिक समझ को मूर्त रूप देंगे। रूस इस बैठक को आयोजित करने की योजना तैयार कर रहा है, जिसमें भारत, रूस, ताजिकिस्तान और अफगानिस्तान के वरिष्ठ अधिकारी व विदेश मंत्री शामिल होंगे। यह बैठक इसी महीने आगे चल कर आयोजित हो सकती है।
मास्को की भी तालिबान को लेकर अपनी चिंताएं हैं, क्योंकि अपनी सीमा पर और मध्य एशियाई गणराज्यों में तालिबान के कुप्रभाव का उसे भय है, जहां कुछ इस्लामी नेटवर्क सक्रिय हैं। पिछले महीने अफगानिस्तान के भविष्य पर संपन्न हुए काबुल सम्मेलन के पूर्व रूस ने भारत के दृष्टिकोण का समर्थन किया था कि 'वहां अच्छे या बुरे तालिबान जैसा कुछ नहीं है।'
राव, ईरानी उप विदेश मंत्री मोहम्मद अली फतोल्लाही के साथ गुरुवार को बातचीत कर नई दिल्ली लौटने वाली हैं, जहां चर्चा के दौरान अफगानिस्तान की स्थिति पर प्रमुखता से बातचीत होने की संभावना है।
वर्ष 2001 में तालिबान को सत्ता से हटाए जाने के दिनों में भारत-ईरान ने रूस के साथ मिल कर उत्तरी गठबंधन का समर्थन किया था। नई दिल्ली में पिछले महीने अपनी बैठक के दौरान विदेश मंत्री एस.एम.कृष्णा और ईरान के आर्थिक मामलों के मंत्री सैयद शमशेद्दीन हुसैनी ने अफगानिस्तान पर आपसी समन्वय के लिए ढांचागत और नियमित विचार-विमर्श करते रहने का निर्णय किया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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