पश्चिम बंगाल में बंद से जनजीवन प्रभावित
बंद का आह्वान पीसीएपीए की एक शाखा के कमांडर प्रमुख सिधू सोरेन के मारे जाने के विरोध में किया गया था।
गोलतोर पुलिस थाने के अंतर्गत आने वाले मेटला वन क्षेत्र में 26 जुलाई को छह अन्य नक्सलियों सहित सोरेन भी सुरक्षा बलों के साथ एक मुठभेड़ में मारा गया था।
झारग्राम जिले के पुलिस अधीक्षक प्रवीन त्रिपाठी ने बताया, "पीसीएपीए और उसकी एक अन्य शाखा 'सिधू कानू गण मिलिशिया' के बंद के आह्वान की वजह से लालगढ़ , झारग्राम और पश्चिमी मिदनापुर के जनजातीय इलाकों में आम जनजीवन प्रभावित हुआ।"
उन्होंने कहा, "सड़कों से वाहन नदारद रहे और दुकानें भी बंद रहीं। हालांकि विद्यालय और सरकारी कार्यालय खुले हुए थे और छात्रों और सरकारी कर्मचारियों की उपस्थिति शून्य रही।"
त्रिपाठी ने कहा, "इस दौरान किसी अप्रिय घटना की जानकारी नहीं मिली और किसी भी हालात से निपटने के लिए सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए थे।"
बांकुरा जिले के पुलिस अधीक्षक प्रणव कुमार ने कहा कि बंकुरा में भी बंद से जनजीवन प्रभावित हुआ है।
उन्होंने बताया, "जिले के रानीबंध, बारिकुल, सरेंगा और खत्रा पुलिस थाने क्षेत्र में बंद का प्रभाव देखा गया। खत्रा के दहल मोरे इलाके में नक्सलियों ने पर्चे बांटे थे। जिसमें बंद में सहयोग करने का आग्रह किया गया था।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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