कश्मीर हिंसा में 22 मरे, उमर ने मांगी केंद्र से मदद (राउंडअप इंट्रो-1)
पुलिस की गोलीबारी का ताजा शिकार बने प्रदर्शनकारी का नाम रमीज अहमद भट्ट है। दक्षिणी कश्मीर के कुलगाम में शाम को पुलिस ने उस समय भीड़ पर गोलीबारी की, जब भीड़ कर्फ्यू तोड़ने की कोशिश कर रही थी। गोलीबारी में चार अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।
इसके पहले कुलगाम में ही पुलिस की गोलीबारी में आशिक हुसैन भट्ट नामक युवक की मौत हो गई थी। यह युवक चावलगाम गांव का निवासी था।
घाटी के ऊपरी बटमालू इलाके में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच संघर्ष के दौरान घायल हुए समीर अहमद राह (8) ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। जबकि स्थानीय निवासियों का आरोप है कि पुलिस ने समीर की पिटाई की। पुलिस का कहना है कि समीर उस समय भगदड़ में घायल हो गया था, जब सुरक्षा बल के जवान प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई कर रहे थे।
अन्य पांच मौतें अनंतनाग (2) और पुलवामा (2), कुलगाम(1) व कुपवाड़ा(1) में हुई हैं। जबकि शनिवार को बिजबेहरा कस्बे में घायल हुए एक युवक ने एक अस्पताल में दम तोड़ दिया और आठ वर्षीय बच्चे ने श्रीनगर में दम तोड़ दिया।
राज्य में जारी हिंसा के एक अंतहीन दुष्चक्र से जूझते जम्मू एवं कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि राजनीतिक उपायों के जरिए ही स्थिति पर काबू किया जा सकता है।
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इस तरह के कदम उठाए जाने के लिए राज्य में सामान्य स्थिति की बहाली आवश्यक है। इसके लिए अब्दुल्ला ने अतिरिक्त सुरक्षा बलों के साथ ही रैपिड एक्शन फोर्स की मांग की है।
प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति ने अब्दुल्ला को दिल्ली तलब किया था।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और अन्य केंद्रीय मंत्रियों के साथ करीब दो घंटे तक चर्चा के बाद अब्दुल्ला ने कहा कि कोई भी राजनीतिक या प्रशासनिक कदम उठाए जाने से पहले केंद्र और राज्य सरकार घाटी में सामान्य स्थिति बहाल करने को लेकर सहमत हैं।
अब्दुल्ला ने कहा, "प्रधानमंत्री के साथ मेरी विस्तृत बातचीत हुई। सामान्य स्थिति लाने के लिए हमने उठाए जाने वाले कदमों के बारे में चर्चा की।"
उन्होंने कहा, "जम्मू एवं कश्मीर की समस्या स्वाभाविक रूप से राजनीतिक है। किसी भी तरह के राजनीतिक या प्रशासनिक कदम उठाए जाने से पहले सामान्य स्थिति बहाल करना बहुत जरूरी है।"
प्रधानमंत्री आवास पर हुई इस बैठक में केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी, केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम, रक्षा मंत्री ए. के. एंटनी और विदेश मंत्री एस. एम. कृष्णा शामिल थे।
24 घंटे के भीतर सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति की यह दूसरी बैठक थी।
सूत्रों ने कहा कि समिति ने अब्दुल्ला को केंद्र सरकार की ओर से पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया है, लेकिन इसके साथ ही उनसे आग्रह किया है कि वह प्रदर्शनकारियों के साथ कड़ाई से निपटें और लोगों तक पहुंचने की कोशिश करें।
अब्दुल्ला से जब पूछा गया कि कौन से कदम उठाए जा सकते हैं तो उन्होंने कहा कि वे सशस्त्र बल (विशेषाधिकार) कानून, जवानों की संख्या कम करने, नियंत्रण रेखा के पार गए युवकों के लिए पुनर्वास और वर्तमान समस्या के पीड़ितों के लिए वित्तीय सहायता पर विचार कर रहे हैं।
सशस्त्र बल (विशेषाधिकार) कानून के तहत सेना के पास कानूनी तौर पर कार्रवाई का अधिकार है और उसे न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती। यह कानून जम्मू एवं कश्मीर में जुलाई 1990 से लागू है।
इसके साथ ही अब्दुला ने राज्य के लोगों से हिंसा को खत्म करने की अपील करते हुए कहा कि वहां हो रहे विरोध प्रदर्शन 'नेतृत्वविहीन' हैं और उसे कोई व्यक्ति या समूह निर्देशित नहीं कर रहा है।
उन्होंने कहा, "मैं नहीं समझता कि घाटी में जो कुछ भी हो रहा है उसके पीछे किसी विशेष समूह या व्यक्ति का हाथ है।" उन्होंने कहा, "यद्यपि घाटी में कई ऐसे तत्व हैं लेकिन वहां जो कुछ भी हो रहा है उसे देखकर लगता है कि वह नेतृत्वविहीन है।"
इससे पहले केंद्र सरकार ने कश्मीर में जारी पथराव और प्रदर्शनों के लिए पाकिस्तान स्थित समूहों को जिम्मेदार ठहराया था।
उमर ने कहा, "हिंसा के दौरान हमने अपनों को खोया है। प्रदर्शनकारी एक घटना के बाद प्रदर्शन करते हैं और हिंसा में एक और व्यक्ति की मौत हो जाती है। हिंसा के इस दुष्चक्र को निश्चित तौर पर रोकना होगा।"
उन्होंने घाटी के प्रदर्शनकारियों को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि कानून को अपने हाथ में लेने वालों को परिणाम भुगतना पड़ेगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे सामान्य स्थिति बहाल करने में सरकार की सहायता करें। इसके अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है।
अब्दुल्ला ने कहा कि राज्य सरकार ने सुरक्षा बलों में बढ़ोतरी करने की केंद्र सरकार से मांग की है। हालात से निपटने के लिए त्वरित कार्रवाई बल की जरूरत है, क्योंकि यह बल इस तरह के हालात से निपटने में माहिर है।
इधर घाटी की स्थिति पर लोकसभा में विपक्षी सदस्यों ने चिंता जताई जिस पर चिदंबरम ने कहा कि वहां की स्थिति 'गंभीर' है और वह जम्मू एवं कश्मीर के मुख्यमंत्री के साथ चर्चा के बाद इस मसले पर बयान देंगे।
लोकसभा में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कहा, "बीते कुछ दिनों से कश्मीर में स्थिति चिंताजनक है। कल (रविवार) सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक भी हुई थी। हम सरकार से यह जानना चाहते हैं कि पूरी स्थिति क्या है और इस पर क्या कदम उठाए जा रहे हैं।"
इस मामले पर जनता दल (युनाइटेड) के अध्यक्ष शरद यादव ने कहा, "कश्मीर के हालात चिंताजनक हैं। मैं समझता हूं कि सरकार इस मामले को लेकर चिंतित है और ऐसे में हम भी पूरी स्थिति से अवगत होना चाहते हैं। हम इस मामले में सरकार का पूरा सहयोग करेंगे।"
कश्मीर के हालात पर समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता मुलायम सिंह यादव ने भी चिंता जताई। उन्होंने कहा, "कश्मीर को लेकर बड़ी समस्या यह है कि अब तक कोई भी सरकार वहां के लोगों का विश्वास नहीं जीत पाई है। समस्या को हल करने के लिए हम सभी को कश्मीर के लोगों का विश्वास जीतना जरूरी है।"
दूसरी ओर कश्मीर में सोमवार को कर्फ्यू तोड़कर हिंसा फैला रही भीड़ पर सुरक्षा बलों द्वारा की गई गोलीबारी में चार और लोगों के मारे जाने और रविवार को घायल एक युवक की सोमवार को मौत हो जाने के बाद घाटी में ताजा हिंसा में मरने वालों की संख्या 19 हो गई है।
पुलिस ने कहा कि दक्षिणी कश्मीर के पुलवामा जिले में काकपोरा रेलवे स्टेशन पर हिंसक भीड़ ने हमलाकर उसे जलाने की कोशिश की।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने आईएएनएस से कहा, "भीड़ को रोकने के लिए सुरक्षा बलों ने हस्तक्षेप किया। लाठीचार्ज करने और आंसू गैस के गोले छोड़ने के बाद भी भीड़ पर नियंत्रण नहीं पाया तो गोलीबारी करनी पड़ी। इस घटना में एक प्रदर्शनकारी मुहम्मद याकूब भट्ट की मौत हो गई जबकि एक घायल हो गया।"
घायल प्रदर्शनकारी को इलाज के लिए श्रीनगर लाया गया है।
दक्षिणी कश्मीर के अनंतनाग जिले के संगम गांव में एक और प्रदर्शनकारी बशीर अहमद रेशी की मौत हो गई। वहां पर एक हिंसक भीड़ दिल्ली पब्लिक स्कूल के भवन को जलाने की कोशिश कर रही थी, जिस कारण सुरक्षा बलों को गोली चलानी पड़ी।
इसके अलावा दक्षिणी कश्मीर के ही कुलगाम शहर में आसपास के ग्रामीणों ने कर्फ्यू तोड़ दिया जिस कारण सुरक्षा बलों ने गोलीबारी की जिसमें एक और युवक आशिक हुसैन भट्ट की मौत हो गई।
कुपवाड़ा जिले के क्रालपोरा गांव में चौथे युवक की मौत हुई। वहां पर भीड़ पथराव कर रही थी। सुरक्षाबलों को गोलीबारी करनी पड़ी, जिसमें खुर्शीद अहमद नामक युवक की मौत हो गई।
उधर, दक्षिणी कश्मीर के बारामूला में आंसू गैस के गोले की चपेट में आकर 31 जुलाई को घायल हुए ताहिर अहमद नाम के युवक की सोमवार को एक अस्पताल में मौत हो गई।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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