भारत ने ब्रिटेन को अफगानिस्तान में आईएसआई की भूमिका की याद दिलाई (लीड-1)
विदेश मंत्री एस. एम. कृष्णा ने ब्रिटिश विदेश मंत्री विलियम हेग से मुलाकात की और कई सारे द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा की। इसमें व्यापार और निवेश, नई ब्रिटिश आव्रजन नीति और घनिष्ठ शैक्षणिक व सांस्कृति संबंध जैसे मुद्दे शामिल थे।
सूत्रों ने कहा कि बातचीत के दौरान भारत ने यूरोपीय संघ के बाहर के कुशल श्रमिकों के आव्रजन पर ब्रिटिश सरकार द्वारा लगाए गए रोक पर अपनी चिंता जताई और कहा कि यह मामला व्यापारिक संबंधों में जान फूंकने के रास्ते में आड़े आ सकता है। हेग ने आश्वस्त किया कि भारत के साथ मशविरा करने के बाद इस नीति में सुधार किया जाएगा।
कृष्णा और हेग ने अफगानिस्तान और पाकिस्तान के हालात और क्षेत्रीय सुरक्षा पर उसके प्रभाव के बारे में भी विचारों का आदान-प्रदान किया।
कृष्णा ने हाल में एक वेबसाइट द्वारा जारी किए गए लीक हुए गोपनीय दस्तावेजों के बारे में भी बातचीत की, जिसमें अफगानिस्तान में अशांति फैलाने और भारत विरोधी गतिविधियों को भड़काने में आईएसआई की भूमिका का विस्तृत ब्योरा दिया गया था। इसके साथ ही कृष्णा ने भारत के सुरक्षा हितों पर उत्पन्न खतरे के बारे में भी अपनी चिंताओं से अवगत कराया।
ब्रिटेन ने भारत की चिंताओं पर गौर किया और क्षेत्र में आतंक निरोधी द्विपक्षीय सहयोग को गहरा बनाने पर सहमति जताई।
भारत ने इस बात को भी रेखांकित किया कि तालिबान के साथ किसी भी तरह का मेल-मिलाप अफगानिस्तान के नेतृत्व में और अफगानिस्तान द्वारा संचालित होना चाहिए।
इसके पहले विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विष्णु प्रकाश ने यहां संवाददाताओं को बताया था, "ब्रिटेन भारत के लिए एक बहुत ही मूल्यवान वार्ताकार है। भारत, अफगानिस्तान सरकार द्वारा किए जा रहे उन तत्वों के साथ मेल-मिलाप के प्रयास का समर्थन करता है, जो हिंसा त्याग कर अफगानिस्तान के संविधान को स्वीकार करने को तैयार हैं।"
विष्णु प्रकाश ने कहा, "हम यह भी चाहते हैं कि इस तरह की कोई भी पहल अफगान नेतृत्व में और अफगानिस्तान द्वारा संचालित होना चाहिए।"
प्रकाश इस सवाल का जवाब दे रहे थे कि क्या प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरन के बीच गुरुवार की बातचीत में अफगानिस्तान और पाकिस्तान से संबंधित मुद्दे उठाएं जाएंगे। कैमरन दो दिवसीय भारत के दौरे पर हैं।
ब्रिटेन तालिबान को अफगानिस्तान की मुख्य धारा में शामिल किए जाने का प्रबल समर्थक है। इससे संबंधित एक प्रस्ताव इस वर्ष जनवरी में लंदन में हुए एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में लाया गया था। इस प्रस्ताव को पिछले सप्ताह काबुल में संपन्न हुए वैश्विक सम्मेलन में भी पेश किया गया था।
कैमरन मंगलवार की रात बेंगलुरू पहुंचे हैं। वह नई दिल्ली में गुरुवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और वरिष्ठ मंत्रियों के साथ कई सारे मुद्दों पर शिष्टमंडल स्तर की बातचीत में हिस्सा लेंगे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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