शिबू सोरेन के खिलाफ याचिका मंजूर (लीड-1)
सोरेन के निजी सचिव झा को 22 मई, 1994 को राजधानी के धौला कुआं से अगवा कर लिया गया था। उसके बाद उन्हें बिहार के एक गांव में ले जाकर उनकी हत्या कर दी गई थी। अगवा करने के बाद गांव ले जाने का काम नंद किशोर मेहता उर्फ नंदू ने किया था। टिकरा टोली नंदू का गांव है।
दूसरी ओर सोरेन ने झारखण्ड में सोमवार को संवाददाताओं से कहा कि वह कानूनी लड़ाई लड़ेंगे और इसमें चिंता की कोई बात नहीं है। उन्होंने कहा, "मैं सर्वोच्च न्यायालय में अपना जवाब दूंगा। चिंता की कोई बात नहीं है।"
जब झा की हत्या हुई थी, उस समय वह सोरेन के निजी सचिव के रूप में काम करते थे। दिल्ली उच्च न्यायालय ने 2008 में इस मामले से सोरेन को बरी कर दिया था।
न्यायाधीश अल्तमस कबीर और न्यायमूर्ति ए.के.पटनायक की खण्डपीठ ने झा की दिवंगत मां प्रियम्बदा देवी सहित पारिवारिक सदस्यों की ओर से याचिका पेश किए जाने के तत्काल बाद इसे स्वीकार कर लिया।
अन्य याचियों में झा की बेटियां कविता और प्रीति और झा के भाई अमरनाथ झा शामिल हैं।
याचियों ने 21 नवंबर 2007 को याचिका दायर की थी और याचिका जनवरी 2008 में सुनवाई के लिए सामने आया। तब सोरेन और अन्य चार को नोटिस जारी किया गया।
चार अन्य वादियों में नंद किशोर मेहता, शैलेंद्र भट्टाचार्य, अजय कुमार मेहता उर्फ दिलीप सिंह और पशुपति नाथ मेहता उर्फ पोशो शामिल हैं।
याचियों की ओर से पेश होते हुए अधिवक्ता के.सुनील ने कहा कि जनवरी 2008 से ही सोरेन और अन्य चारों ने कोई न कोई बहाना कर के मामले की कार्यवाही लटकाने के लिए 13 तारीखें टलवाई।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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