वैज्ञानिकों ने हरियाणा में बवंडर वाले क्षेत्र का निरीक्षण किया (लीड-1)
फतेहाबाद(हरियाणा), 24 जुलाई (आईएएनएस)। वैज्ञानिकों ने शनिवार को हरियाणा के फतेहाबाद जिले में उस इलाके का निरीक्षण किया, जहां एक युवक और कुछ किसानों ने हवा में अचानक पानी की सैकड़ों मीटर लंबी ऊपर उठती हुई एक लकीर देखी थी। उस दृश्य को देख कर वे सभी अचंभित रह गया था।
मौसम विज्ञान विभाग, चंडीगढ़ के निदेशक सुरेंद्र पाल और वैज्ञानिक विवेक धवन ने अहलिसदार गांव के पास बवंडर स्थल का निरीक्षण किया और इलाके के किसानों से गुरुवार (22 जुलाई) को दिखाई दिए बवंडर के बारे में जानकारी जुटाई।
खेत से सैकड़ों फुट की ऊंचाई तक वातावरण में उठती पानी की लकीर को गांव के कुछ निवासियों ने देखा था। इसमें किसान देशराज और हंसराज तथा एक युवक प्रवीण कंबोज शामिल है।
कंबोज ने उस दृश्य का अपने मोबाइल फोन से चित्र उतार लिया था। मौसम विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह बवंडर (टारनेडो) था।
यह वाकया चण्डीगढ़ से तकरीबन 280 किलोमीटर की दूरी पर स्थित अलीसदर गांव का है, जहां इसके पहले ऐसा प्राकृतिक दृश्य नहीं देखा गया था।
कंबोज ने बताया, "मैं अपने खेत में काम कर रहा था। उस दिन काले बादल छाए हुए थे। मैंने देखा कि एक पाइपनुमा आकृति बन गई है जिससे खेत में पानी ऊपर की तरफ जा रहा है। पानी की धार जमीन को आकाश से जोड़ रही थी।"
देशराज और हंसराज ने वैज्ञानिकों को बताया, "घने बादलों के बीच 22 जुलाई को अपराह्न् दो बजे एक पाईप के आकार की आकृति पैदा हुई और बाद में खेत से पानी उसकी ओर बढ़ने लगा। उसके बाद पानी पास के खेतों में बारिश के रूप में गिरने लगा। यह दृश्य कम से कम 12 मिनट तक दिखाई दिया। इससे इलाके की कपास की फसलों को क्षति पहुंची।"
सुरेंद्र पॉल ने आईएएनएस को बताया, "आमतौर पर बवंडर को अमेरिका के कुछ निश्चित क्षेत्रों में देखा जाता है। यह भारत में भी कभी कभार नजर आ जाता है, लेकिन यहां यह वाकया कोई पहला नहीं है। बवंडर हवा के भारी दबाव और बादलों के कई तह से बनता है। पानी की धारनुमा लकीर आसमान से बनती है और जमीन पर से पानी ऊपर की तरफ खींचती है।"
पॉल ने कहा कि बवंडर हालांकि उत्तर भारत में दुर्लभ तरीके से ही दिखाई देता है। पंजाब के लुधियाना में वर्ष 1978,1997 और 2007 में बवंडर दिखाई दिया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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