नागरिक अवज्ञा आंदोलन का आह्वान

अल्ताफ़ हुसैन
बीबीसी संवाददाता, श्रीनगर
भारत प्रशासित कश्मीर में अलगाववादियों के एक प्रमुख संगठन ने नागरिक अवज्ञा आंदोलन का आह्वान किया है. उसने जनता से अपील की है कि वे सरकार को कोई कर नहीं दें.
यह आह्वान सर्वदलीय हुर्रियत कॉन्फ़्रेंस के सैयद अली शाह गिलानी वाले कट्टरपंथी धड़े ने अपने कश्मीर छोड़ो आंदोलन के तहत किया है.
इस आंदोलन की शुरुआत पिछले महीने की गई थी.
उल्ल्खनीय है कि गिलानी इस समय जेल में हैं और आंदोलन की कमान धड़े के छोटे नेताओं के हाथ में है जो भूमिगत रहते हुए सक्रिय हैं.
हुर्रियत ने लोगों से बिजली-पानी के बिल नहीं जमा करने के साथ-साथ आयकर और वैट का भुगतान भी नहीं करने को कहा है.
एक स्थानीय समाचार एजेंसी को पहुँचाए अपने बयान में कान्फ़्रेंस ने सरकारी कर्मचारियों से कहा है कि वे व्यापारियों और आम लोगों से करों की वसूली नहीं करें.
हुर्रियत के गिलानी धड़े ने कश्मीर घाटी में बंद की अवधि अगले शुक्रवार तक बढ़ाने की भी घोषणा की है. हालाँकि रविवार और मंगलवार को इसमें छूट दी जाएगी.
उल्लेखनीय है कि उग्रवादी संगठनों के गठजोड़ यूनाइटेड जेहाद काउंसिल के प्रमुख सैयद सलाहुद्दीन ने पूरी घाटी में एक साथ बंद आयोजित किए जाने के ख़िलाफ़ बयान दिया था.
पत्रकारों के सामने चेहरा ढंक कर उपस्थित हुए कुछ युवाओं ने सलाहुद्दीन की अपील का विरोध करते हुए कहा है कि उग्रवादी नेता चूँकि पाकिस्तान में रहते हैं, इसलिए उन्हें कश्मीरी जनता पर सेना के कथित अत्याचार का अंदाज़ा नहीं है.
उल्लेखनीय है कि हुर्रियत के गिलानी धड़े के बंद के आहवान के चलते पिछले 27 दिनों से घाटी में जनजीवन अस्त-व्यस्त है.
इस दौरान सेना और अर्द्धसैनिक बलों की गोलियों से कम-से-कम 17 लोगों की मौत हो चुकी है.












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