अमेरिकी सांसदों ने चीन-पाकिस्तान परमाणु समझौते के प्रति चेताया

वाशिंगटन, 24 जुलाई (आईएएनएस)। दो अमेरिकी सांसदों ने चेतावनी दी है कि चीन-पाकिस्तान का गुप्त परमाणु समझौता एक गलत उदाहरण खड़ा कर रहा है, क्योंकि इस्लामाबाद ने अपनी परमाणु क्षमता अंतर्राष्ट्रीय धोखे और गुप्त खरीदारी नेटवर्क के जरिए हासिल की है।

कांग्रेस इंडिया कौकस के रिपब्लिकन सह अध्यक्ष एड रॉयस ने परमाणु प्रसार पर आयोजित संसदीय समिति की सुनवाई में कहा, "डब्ल्यूएमडी (जन संहार के हथियार) के प्रसारकर्ता के रूप में चीन का कुख्यात रिकॉर्ड इस बात की मांग करता है कि उस पर कड़ी नजर रखी जाए।"

उन्होंने कहा, "चीन के पिछले व्यवहार को देखते हुए मुझे उसके निर्यात नियंत्रण के दावे पर संदेह है।"

रॉयस ने कहा, "पाकिस्तान को दो परमाणु रिएक्टर बेचने की घोषणा और ईरान के ऊर्जा क्षेत्र में अरबों डॉलर के निवेश की चीन की योजना चीन के स्वभाव के संदर्भ में अन्य उदाहरण हैं और मैं सोचता हूं कि निर्यात नियंत्रण को ढीला करने के लिए ओबामा प्रशासन पर बीजिंग का दबाव चिंताजनक है।"

पिछले सप्ताह संसद की विदेशी मामलों की समिति की आतंकवाद, अप्रसार और व्यापार मामलों की उपसमिति की सुनवाई की अध्यक्षता करते हुए सांसद ब्रैड शरमैन ने कहा, "1998 में पाकिस्तान ने अपना पहला परमाणु परीक्षण किया था, लेकिन उसने अपना परमाणु हथियार उसके बहुत पहले ही विकसित कर लिया था।"

उन्होंने कहा, "पाकिस्तान ने वह क्षमता अंतर्राष्ट्रीय धोखेबाजी के जरिए हासिल की है, जिसमें विभिन्न उपकरणों के वास्तविक अंतिम उपयोगकर्ता गुप्त खरीदी नेटवर्क के जरिए शामिल था।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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