हरियाणा के गांव में बवंडर दिखा

मौसम विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह बवंडर (टारनेडो) था।

यह वाकया चण्डीगढ़ से तकरीबन 280 किलोमीटर की दूरी पर स्थित अलीसदर गांव का है, जहां इसके पहले ऐसा प्राकृतिक दृश्य नहीं देखा गया था। अपने खेत में काम कर रहा प्रवीन कम्बोज गुरुवार शाम को ऐसी तस्वीर देख चकरा गया था। बवंडर की तस्वीर उसके मोबाइल फोन में भी कैद है।

कम्बोज ने बताया, "मैं अपने खेत में काम कर रहा था। उस दिन काले बादल छाए हुए थे। मैंने देखा कि एक पाइपनुमा आकृति बन गई है जिससे खेत में पानी ऊपर की तरफ जा रहा है। पानी की धार जमीन को आकाश से जोड़ रही थी।"

बवंडर कुछ ही मिनट तक कायम रहा। जलवायु मामलों के जानकारों का कहना है कि पानी की धार बवंडर था। यह भारत में कभी-कभी दिखाई देता है।

चण्डीगढ़ में मौसम केंद्र के निदेशक सुरेंद्र पॉल ने आईएएनएस को बताया, "आमतौर पर बवंडर को अमेरिका के कुछ निश्चित क्षेत्रों में देखा जाता है। यह भारत में भी कभी कभार नजर आ जाता है, लेकिन यहां यह वाकया कोई पहला नहीं है। बवंडर हवा के भारी दबाव और बादलों के कई तह से बनता है। पानी की धारनुमा लकीर आसमान से बनती है और जमीन पर से पानी ऊपर की तरफ खींचती है।"

पॉल ने कहा कि बवंडर हालांकि उत्तर भारत में दुर्लभ तरीके से ही दिखाई देता है। पंजाब के लुधियाना में वर्ष 1978,1997 और 2007 में बवंडर दिखाई दिया था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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