35,000 पूर्व सैनिकों की नौकरी खतरे में!

वर्तमान में एनएचएएआई अधिकृत टोल प्लाजा पर 25,000 पूर्व सैनिक काम कर रहे हैं जबकि ऐसे ही 10,000 सैनिक टोल प्लाजा पर साजो-सामान के साथ ही रणनीतिक सहयोग प्रदान करते हैं।
एनएचएआई ने गत 22 जून को इस फैसले के संदर्भ में एक आदेश पारित किया था। इस आदेश के क्रियान्वयन के पहले चरण में देश भर के 50 टोल प्लाजा के लिए सरकारी निविदाएं भी जारी कर दी गई हैं।
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वर्ष 2004 से इन टोल प्लाजा पर पूर्व सैनिकों को बहाल किया गया है। जब से इस काम में पूर्व सैनिकों को लगाया गया है तब से टोल संग्रह में खासा वृद्धि हुई है। पूर्व सैनिकों को इस मोर्चे पर लगाए जाने के बाद से टोल संग्रह की दर 15 फीसदी से बढ़कर 80 फीसदी तक हो गई है।
देश भर की विभिन्न टोल प्लाजा से सरकार को 1700 करोड़ रुपये का राजस्व लाभ होता है। इसके चलते पूर्व सैनिकों को अच्छी खासी आमदनी भी हो जाती है। वर्तमान सरकार के अधीन उन्हें इस राजस्व का 10 फीसदी कमीशन भी मिलता है।
एनएचएआई के इस फैसले का पूर्व सैनिक विरोध कर रहे हैं। गत दिनों सेवानिवृत्त कर्नल एच. एस. चौधरी के नेतृत्व में पूर्व सैनिकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने रक्षा मंत्री ए. के. एंटनी से मुलाकात की थी और इस पर रोक लगाने की मांग की थी। एंटनी ने उन्हें आश्वासन दिया था कि वे सड़क व परिवहन मंत्री कमलनाथ से इस संबंध में चर्चा करेंगे।
इन सैनिकों ने कमलनाथ से भी भेंट की और उनसे आग्रह किया कि पूर्व सैनिकों के परिवार के दो लाख सदस्यों को बर्बाद करने वाले अपने फैसले की वह फिर से समीक्षा करें। उन्होंने उन्हें यह भी याद दिलाया कि यह फैसला वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव के संप्रग के घोषणापत्र का भी उल्लंघन है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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