समाचार चैनल के दफ्तर पर हमला, सबने की निंदा (राउंडअप)
झंडेवालान एक्सटेंशन स्थित कार्यालय में शाम करीब पांच बजे घुसी भीड़ ने यह हमला किया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के कुछ नेताओं कि खिलाफ किए गए स्टिंग आपरेशन के विरोध में इस हमले को अंजाम दिया गया।
पुलिस के अनुसार भीड़ में शामिल लोग चैनल के खिलाफ नारे लगा रहे थे। उसी समय कुछ और लोग भीड़ में शामिल हो गए। वे दरवाजों को तोड़ते हुए कार्यालय के भीतर घुसे। वहां रखे गमलों और सजावटी समान को तोड़ दिया तथा प्रथम तल पर बनी कॉफी शॉप को भी क्षतिग्रस्त कर दिया।
एक कर्मचारी ने बताया, "उन्होंने लिफ्ट के जरिये चौथी मंजिल पर पहुंचने के प्रयास किया जहां हेडलाइंस टुडे का कार्यालय है, लेकिन लिफ्ट बंद था। लोगों ने कई कैमरों और वाहनों को क्षतिग्रस्त कर दिया।"
पुलिस ने सीढ़ियों से चौथी मंजिल पर चढ़ने का प्रयास कर रही भीड़ को रोक दिया।
पुलिस के एक अधिकारी ने बताया, "हमने आरएसएस के सदस्य होने के संदेह में 30 लोगों को हिरासत में लिया है। मामले की जांच चल रही है।"
उल्लेखनीय है कि हेडलाइंस टुडे ने एक जून को स्टिंग आपरेशन चलाया था। इसमें आरएसएस नेता इंद्रेश कुमार की गुप्त बैठकों के टेप जुटाए गए थे, जिसमें देश में आतंकवादी हमले किए जाने की जरूरत पर चर्चा की गई थी।
बैठकों के वीडियो टेप में आरएसएस के केंद्रीय अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य एवं वर्ष 2006 से संगठन के संपर्क प्रचारक कुमार नजर आ रहे थे।
हमले के बाद आरएसएस की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि आरएसएस एक देशभक्त सामाजिक संगठन है और मीडिया के कुछ लोग संघ के कुछ वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के बारे में कीचड़ उछाल रहे हैं, जो आपत्तिजनक है।
बयान में हालांकि यह दावा किया गया है कि उसके कार्यकर्ताओं ने शांतिपूर्वक प्रदर्शन किया।
मीडिया के दफ्तर पर हमले की निंदा करते हुए वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने कहा कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, मीडिया पर अब तक जितने भी हमले हुए हैं, वे आरएसएस, बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं ने किए हैं। इनकी संस्कृति ही ऐसी है। इस हमले की जितनी भी निंदा की जाए कम होगी। हमलावरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष लालू प्रसाद ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा, "समाचार चैनल ने देशवासियों की आंखें खोल दी है कि संघ के कार्यकर्ता किस प्रकार आतंकवादी घटनाओं में संलिप्त हैं। वे किस प्रकार और कैसे योजना बना रहे हैं।"
उन्होंने कहा, "सच्चाई सामने आ गई तो वे लोग हिंसा पर उतारू हो गए। ये फासीवादी लोग हैं। इन पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।"
लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के अध्यक्ष रामविलास पासवान ने हमले की कड़ी निंदा करते हुए आरएसएस पर प्रतिबंध लगाए जाने की मांग की। उन्होंने कहा, "अरएसएस का यही चरित्र है। उस पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। जब सिमी पर प्रतिबंध लग सकता है तो आरएसएस पर क्यों नहीं।"
कांग्रेस नेता सत्यव्रत चतुर्वेदी ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा, "बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है यह हमला लेकिन यह आश्चर्चजनक नहीं है। असहिष्णुता और हिसक प्रदर्शन आरएसएस का चरित्र है। मैं सरकार से मांग करता हूं कि फासीवाद को मजबूत करने की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्ती से निपटा जाए।"
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के प्रवक्ता डी. पी. त्रिपाठी ने कहा, "आरएसएस देश में नफरत फैलास रहा है और इससे देश में आतंकवाद फैल रहा है। साध्वी प्रज्ञा और साध्वी ऋतम्भरा भी आतंकवादी हैं। इस हमले की जांच होनी चाहिए और इस निंदनीय कार्रवाई के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।"
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के वरिष्ठ नेता सीताराम येचुरी ने कहा कि यह यह लोकतंत्र पर हमला है। मीडिया की स्वतंत्रता पर हमला है। ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
आरएसएस के वरिष्ठ पदाधिकारी राम माधव ने इस घटना को जायज ठहराते हुए कहा, "तोडफोड़ की कोई योजना नहीं थी। हमारी योजना केवल धरना देने की थी।" उन्होंने आरोप लगया कि किसी राजनीतिक दल के दवाब में संघ व उसके नेताओं को बदनाम करने की योजना के तहत समाचार चैनल द्वारा दुष्प्रचार किया जा रहा है। इसका विरोध करने के लिए कुछ लोग वहां पहुंचे थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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