बोगोटा में गूंजा भारत का नाम: FILBo 2026 में कैसे भारतीय संस्कृति ने जीता सबका दिल
बोगोटा इंटरनेशनल बुक फेयर 2026 में 'इंडिया पवेलियन' लगातार दर्शकों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। मेले के सातवें से नौवें दिन तक 'भारत/इंडिया स्टेज' और 'किड्स ज़ोन' में साहित्यिक चर्चाओं, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और इंटरैक्टिव सत्रों की धूम रही।

सातवें दिन की शुरुआत "बहुभाषी भारत: भाषाओं और पाठकों के बीच लेखन" सत्र के साथ हुई। इसमें वक्ताओं ने चर्चा की कि कैसे भाषाएं सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करती हैं। इस दौरान भाषाई विविधता के बावजूद भारत की एकता और साहित्यिक मौलिकता को बचाए रखने में अनुवाद की भूमिका पर जोर दिया गया।
एक अन्य सत्र "योग साधक के रूप में मेरा अनुभव: कोलंबिया से भारत और वापसी" में योग को भारतीय दर्शन से जुड़ी एक परिवर्तनकारी पद्धति के रूप में पेश किया गया। विशेषज्ञों ने योग के बुनियादी सिद्धांतों से लेकर आध्यात्मिक जागरूकता के उच्च स्तर तक के सफर पर विस्तार से बात की।
दिन का समापन "स्टोरीज इन मोशन: प्रदर्शन और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति" सत्र के साथ हुआ, जिसमें सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने में थिएटर और सिनेमा की भूमिका को परखा गया। शाम को कथक और भरतनाट्यम जैसे शास्त्रीय नृत्यों की प्रस्तुति हुई, जिसके बाद फिल्म 'नीरजा' की स्क्रीनिंग की गई। बारिश के बावजूद 'किड्स ज़ोन' में बच्चों का उत्साह कम नहीं हुआ और वे कहानी सुनाने के सत्रों और क्विज़ प्रतियोगिताओं में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते दिखे।
टैगोर और भगवद गीता की वैश्विक प्रासंगिकता पर चर्चा
आठवें दिन की शुरुआत "वैश्विक नागरिक के रूप में टैगोर" सत्र से हुई। इसमें रवींद्रनाथ टैगोर के मानवतावाद और लैटिन अमेरिकी साहित्य के साथ उनके जुड़ाव सहित उनके वैश्विक प्रभाव पर चर्चा की गई।
एक अन्य महत्वपूर्ण सत्र "भगवद गीता का सार्वभौमिक संदेश: भारत और उससे परे" में वक्ताओं ने कर्तव्य, आत्म-जागरूकता और आंतरिक संतुलन के मार्गदर्शक के रूप में गीता की प्रासंगिकता बताई। योग और वेलनेस सत्रों में समग्र स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित किया गया, जबकि शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व पर हुई चर्चा में आज की दुनिया में नैतिकता और आत्म-चिंतन के महत्व को रेखांकित किया गया।
दिन का अंत सांस्कृतिक कार्यक्रमों और बॉलीवुड फिल्म 'क्वीन' की स्क्रीनिंग के साथ हुआ। 'किड्स ज़ोन' में इलस्ट्रेशन वर्कशॉप और 'इंडिया क्विज़' के जरिए बच्चों ने भारत को करीब से जाना, जिससे उनकी जिज्ञासा और बढ़ी।
समकालीन साहित्य और डिजिटल स्टोरीटेलिंग पर जोर
नौवें दिन भारतीय भाषाओं के साहित्य के रुझानों पर चर्चा हुई, जिसमें पंजाबी, गुजराती और हिंदी लेखन की विविधता को प्रदर्शित किया गया। एक अन्य सत्र में इस बात पर मंथन हुआ कि कैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म भौगोलिक सीमाओं को तोड़कर कहानियों को विस्तार दे रहे हैं, हालांकि पाठकों की गहराई से जुड़ने की कमी पर चिंता भी जताई गई।
"नेशनल टेल्स, ग्लोबल स्टेजेस: बुक फेस्टिवल्स की भूमिका" सत्र में बताया गया कि कैसे ऐसे आयोजन सांस्कृतिक आदान-प्रदान के साथ-साथ आर्थिक अवसरों के लिए भी बड़े मंच साबित होते हैं। स्पेनिश भाषी बाजारों में भारत के विस्तार के प्रयासों पर भी चर्चा हुई और मेले में कई अनूदित कृतियां पेश की गईं।
समापन सत्र में भारतीय ज्ञान प्रणालियों, स्थिरता (सस्टेनेबिलिटी) और तेजी से बदलती दुनिया में सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की जरूरत पर ध्यान केंद्रित किया गया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और गतिविधियों ने बांधे रखा समां
दिन का समापन भरतनाट्यम की प्रस्तुति और फिल्म 'सूररई पोट्रु' की स्क्रीनिंग के साथ हुआ। वहीं, 'किड्स ज़ोन' में कहानी सुनाने के सत्र, क्रिएटिव वर्कशॉप और क्विज़ गतिविधियां जारी रहीं। कुल मिलाकर, FILBo 2026 में इंडिया पवेलियन एक ऐसे जीवंत मंच के रूप में उभरा है, जिसने वैश्विक दर्शकों के सामने भारत की साहित्यिक समृद्धि, दार्शनिक गहराई और सांस्कृतिक विविधता को बखूबी पेश किया है।












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