मप्र ने केंद्र से 5500 करोड़ रुपये की मांग की
चौहान का कहना था कि सभी बच्चों को शिक्षा देने के लिए केंद्र सरकार 90 प्रतिशत राशि दे और 10 प्रतिशत राशि राज्य वहन करेगा। वर्तमान में केंद्र का 55 प्रतिशत और राज्यों का 45 प्रतिशत का अनुपात रखा गया है।
चौहान ने सिब्बल का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि राज्य में केंद्रीय विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की अनुशंसा के अनुसार छठवें वेतन आयोग का लाभ प्रदेश के महाविद्यालयों के प्राध्यापकों को दिया गया है। उन्होंने कहा कि अब बकाया राशि (एरियर) के भुगतान के लिए 418 करोड़ रुपये की राशि शीघ्र भारत सरकार द्वारा जारी की जाए। चौहान ने कहा कि केंद्र से राशि मिलने के बाद प्रदेश सरकार एरियर का भुगतान करेगी।
चौहान ने बताया कि प्रदेश के 201 शैक्षणिक दृष्टि से पिछड़े विकास खंडों में कस्तूरबा गांधी मॉडल स्कूल एवं गर्ल्स हॉस्टल के निर्माण के लिए 38 लाख रुपये स्वीकृत हैं, जिसे बढ़ाकर 85 लाख रुपये किया जाए।
उन्होंने कहा कि शिक्षा के अधिकार के तहत शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यता का निर्धारण एकेडमिक अथॉरिटी द्वारा किया जाना है लेकिन अब तक भारत सरकार ने इसका गठन नहीं किया है जबकि प्रदेश में शिक्षकों की भर्ती की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। इसी प्रकार सर्व शिक्षा अभियान के मानदंड निर्धारित नहीं किए गए हैं। उन्होंने कहा कि इससे शिक्षा के अधिकार अधिनियम की अपेक्षाएं पूरी करने में कठिनाई आएगी।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में स्थापित होने वाले एक विश्वस्तरीय विश्वविद्यालय के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय से स्वीकृति प्राप्त नहीं हुई है जबकि मध्य प्रदेश में भोपाल के निकट 600 एकड़ जमीन इसके लिए चयनित की गई है। इसका प्रस्ताव भी मानव संसाधन मंत्रालय को भेज दिया गया है।
चौहान ने प्रदेश के सिंगरौली में 'इंडियन स्कूल ऑफ माइन्स', धनबाद की एक शाखा खोलने की अनुमति पूर्व में सिंगरौली में दी थी लेकिन अब तक केंद्र ने आवश्यक स्वीकृति जारी नहीं की है। चौहान ने कहा कि इसके लिए मध्य प्रदेश सरकार ने जमीन उपलब्ध करा दी है अब केंद्र से आवश्यक स्वीकृति शीघ्र जारी की जाए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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