नक्सलियों के खिलाफ एकीकृत कमान बनाएं राज्य : चिदंबरम (लीड-2)

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में चिदंबरम ने कहा कि राज्यों को नक्सलियों के खिलाफ अभियान में समन्वय करना चाहिए क्योंकि कानून एवं व्यवस्था की स्थिति को बनाए रखने की प्राथमिक जिम्मेदारी राज्य सरकारों की हैं।

प्रधानमंत्री आवास 7 रेसकोर्स पर हुई बैठक में चिदंबरम ने कहा, "कानून और व्यवस्था लागू करने और वामपंथी आतंकवाद से निपटने की राज्य सरकारों की प्राथमिक जिम्मेदारी और भूमिका को केंद्र सरकार स्वीकार करती है।"

उन्होंने कहा कि सरकार छत्तीसगढ़, झारखण्ड, उड़ीसा और पश्चिम बंगाल की सरकारों से नक्सलियों के खिलाफ एक एकीकृत कमान में सेना के एक अवकाश प्राप्त मेजर जनरल को इसका सदस्य बनाने का आग्रह करती है।

चिदंबरम ने चारों राज्यों से नक्सल विरोधी अभियानों के लिए एक पुलिस महानिरीक्षक नियुक्त करने को कहा। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) का एक महानिरीक्षक 'आईजी ऑपरेशंस' के तौर पर नियुक्त होगा तथा दोनों को समन्वय से काम करना होगा।

चिदंबरम ने कहा कि केंद्र सरकार राज्यों को हर तरह की मदद देने की अपनी जिम्मेदारी और भूमिका स्वीकार करती है। इसमें केंद्रीय अर्ध सैनिक बलों की तैनाती, खुफिया सूचनाओं की साझेदारी, पुलिस के आधुनिकीकरण के लिए कोश और साजो सामान उपलब्ध कराना तथा अन्य समर्थन शामिल है।

उन्होंने का साजो-सामान की ढुलाई, सुरक्षा बलों के आवागमन और अन्य कार्यो के लिए केंद्र सरकार अधिक हेलीकॉप्टर उपलब्ध कराएगी। प्रभावित जिलों में 400 पुलिस स्टेशनों की मजबूती और स्थापना के लिए हर थाने को दो करोड़ रुपये उपलब्ध कराए जाएंगे।

सरकार नक्सल प्रभावित जिलों में अतिरिक्त विशेष पुलिस अधिकारियों के पदों को मंजूरी देगी।

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि सर्वाधिक नक्सल प्रभावित 34 जिलों में सड़कों की स्थिति को सुधारा जाएगा और 950 करोड़ रुपये की लागत से काफी अधिक सड़कों और पुलों के निर्माण का प्रस्ताव है।

उन्होंने कहा कि योजना आयोग नक्सल प्रभावित जिलों के लिए विशेष विकास योजना पर विचार कर रहा है। इसमें सड़क संपर्को, प्राथमिक शिक्षा, प्राथमिक स्वास्थ्य व्यवस्था और पेयजल की उपलब्धता पर विशेष जोर होगा।

चिदंबरम के अनुसार जब तक इस प्रमुख वामपंथी आतंकवादी संगठन को प्रभावी चुनौती नहीं दी गई थी, इसने अपनी गतिविधियों के लिए इलाके का विस्तार किया, सदस्यों की भर्ती की, अधिकाधिक लोगों का अपहरण किया, जबरन वसूली की, हथियारों की लूट की और सुरक्षा बलों तथा आम नागरिकों को निशाना बनाया।

चिदंबरम ने कहा कि भाकपा (माओवादी) ने वर्ष 2004 से 2008 के बीच हर वर्ष औसतन 500 नागरिकों की हत्या की है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2009 में 591 नागरिकों की हत्या की गई, इनमें से 211 को पुलिस का मुखबिर करार दिया गया था। यह प्रवृत्ति वर्ष 2010 के पहले छह महीनों में भी कायम है और 325 नागरिकों को अब तक नक्सली मार चुके हैं। इनमें 142 को मुखबिर बताया गया था।

बैठक में उड़ीसा, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और बिहार के मुख्यमंत्रियों सहित झारखण्ड के राज्यपाल और पश्चिम बंगाल के एक मंत्री ने हिस्सा लिया। इस बैठक में केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी और रक्षा मंत्री ए. के. एंटनी भी मौजूद थे।

केंद्र की नक्सल विरोधी नीति से असंगति जताते हुए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि नक्सली हमारे समाज का हिस्सा हैं और समस्या से केवल बल प्रयोग से नहीं वरन निरंतर विकास से निपटा जाना चाहिए।

कुमार ने कहा, "नक्सली तत्व हमारे समाज का हिस्सा हैं। भले ही गुमराह होकर उन्होंने हिंसा का रास्ता पकड़ा है।"

उन्होंने कहा, "बल प्रयोग से केवल अलगाव और बढ़ेगा, आतंकवादी संगठनों के नेता नायक बन जाएंगे और इससे समस्या का केवल सतही हल निकलता दिखेगा जबकि मूल समस्या और अधिक बिगड़ जाएगी।"

इस बारे में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने कहा कि नक्सलियों का मुकाबला करने के लिए नक्सल प्रभावित राज्यों को एक 'एकीकृत कार्य योजना' की आवश्यकता है।

रमन सिंह ने कहा, "राज्य सरकारें इस समस्या से अपने हिसाब से निपट रहीं हैं। एक एकीकृत कार्य योजना तैयार की जानी चाहिए और हम सभी को एक बिंदु पर होना चाहिए।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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