निरुपमा राव ने दलाई लामा से बातचीत की (लीड-3)
एक अधिकारी ने बताया कि दलाई लामा के आधिकारिक आवास में लगभग 90 मिनट तक बातचीत चली।
अधिकारी ने कहा, "बंद कमरे में संपन्न हुई इस बैठक में निर्वासित सरकार के प्रधानमंत्री सामदोंग रिनपोछे सहित उच्च पदस्थ अधिकारियों ने हिस्सा लिया।"
दलाई लामा के कार्यालय में संयुक्त सचिव तेनजिन तकल्हा ने आईएएनएस को बताया, "बैठक के दौरान आपसी हित के मुद्दों पर चर्चा हुई।" लेकिन क्या चर्चा हुई, उन्होंने नहीं बताया।
अधिकारी ने बताया, "राव सहित विदेश मंत्रालय के अधिकरियों के साथ दलाई लामा की बातचीत आधिकारिक स्थल पर शाम 4.15 बजे शुरू हुई। बंद कमरे में चल रही बैठक में निर्वासित तिब्बती सरकार के प्रधानमंत्री सामदोंग रिनपोचे सहित उच्चस्तरीय अधिकरी भाग ले रहे हैं।"
विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने हालांकि इस बैठक पर टिप्पणी करने और राव के दौरे का उद्देश्य बताने से इंकार कर दिया।
इससे पहले राव धर्मशाला के निकटवर्ती गग्गल हवाई अड्डे पर दोपहर बाद 2.15 बजे पहुंचीं और वहां से सीधे निर्वासित तिब्बती सरकार के मुख्यालय पहुंचीं। उनका विमान यहां एक घंटा विलंब से पहुंचा।
राव ने हवाई अड्डे पर मीडिया कर्मियों के सवालों का जवाब देने से इंकार कर दिया।
दलाई लामा के कार्यालय ने भी राव के दौर पर कोई टिप्पणी नहीं की। उल्लेखनीय है कि विदेश सचिव चीन में भारत की राजदूत रह चुकी हैं।
जिले के पुलिस अधीक्षक अतुल फुलजेले ने आईएएनएस को बताया कि तिब्बती सरकार ने राव के ठहरने की व्यवस्था मैकलियोडगंज में की है। राव के सम्मान में शनिवार को रात्रिभोज रखा गया है। वह रविवार को दोपहर बाद दिल्ली के लिए रवाना होंगी।
विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार राव का दलाई लामा से मिलने और निर्वासित तिब्बती सरकार के अधिकारियों के साथ चर्चा करने के अलावा कोई कार्यक्रम नहीं है।
दलाई लामा के कार्यालय ने हालांकि राव की यात्रा के बारे में कोई टिप्पणी नहीं की है।
दलाई लामा के कार्यालय के सूत्रों के मुताबिक विदेश सचिव नोबेल शांति पुरस्कार विजेता दलाई लामा के साथ निर्वासित तिब्बतियों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने वाली थीं।
सूत्रों के अनुसार अपना गृहक्षेत्र छोड़कर 1959 से भारत में रह रहे दलाई लामा की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे पर भी चर्चा होने वाली थी।
उल्लेखनीय है कि 'मध्यमार्ग' में विश्वास रखने वाले दलाई लामा तिब्बत के लिए पूर्ण स्वायत्तता की मांग कर रहे हैं। उनकी नजर में चीन प्रतिकूल तत्व है, क्योंकि वह तिब्बत को स्वायत्तता देने के पक्ष में नहीं है।
ज्ञात हो कि तिब्बत की निर्वासित सरकार को किसी देश ने मान्यता नहीं दी है। लगभग 140,000 तिब्बती निर्वासित जीवन जी रहे हैं। उनमें से 100,000 से अधिक भारत के विभिन्न हिस्सों में रह रहे हैं।
पुलिस उपायुक्त (कांगड़ा) आर.एस.गुप्ता ने बताया, "इससे पहले राव की यात्रा तीन-चार बार रद्द हो चुकी है।"
ज्ञात हो कि दलाई लामा के साथ राव की बैठक ऐसे समय में हुई है, जब कुछ ही दिनों पूर्व मेनन ने प्रधानमंत्री के विशेष दूत के रूप में बीजिंग की यात्रा की थी और चीनी नेतृत्व से मुलाकात की थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications