'लोगों की जान से बड़ी नहीं वीवीआईपी सुरक्षा'

लखनऊ, 9 जुलाई(आईएएनएस)। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सुरक्षा व्यवस्था के चलते कानपुर में एक घायल बच्चे की समय पर अस्पताल न पहुंच पाने के कारण हुई मौत को लेकर शहर के लोगों में रोष है। उनका कहना है कि वीवीआईपी सुरक्षा से बड़ी लोगों की जान है।

एडवरटाइजिंग कंपनी में प्रबंधक मनीष कुमार का कहना है कि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या अन्य कोई वीवीआईपी शहर में आते हैं तो उसकी सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता होनी चाहिए, लेकिन इसकी आड़ में मानवीय संवेदना को ताक पर नहीं रखनी चाहिए। अगर कोई मर रहा हो तो उसे अस्पताल पहुंचाने में मदद करनी चाहिए, न कि रोका जाना चाहिए।

प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक अनिल द्विवेदी का कहना है कि खास लोगों की सुरक्षा के नाम पर आम लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ नहीं किया जाना चाहिए। जरूरत के मुताबिक व्यवस्था में परिवर्तन लाना चाहिए।

निजी बैंक में प्रबंधक अमित सुमन ने कहा है कि अगर कानपुर में पुलिसकर्मी चाहते तो अपनी गाड़ी से भी घायल अमान को अस्पताल पहुंचा सकते थे। पुलिस की इस अमानवीय सोच को बदलने की जरूरत है।

कानपुर के प्रथम नागरिक एवं महापौर रवींद्र पाटनी ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि वीवीआईपी सुरक्षा के नाम पर पूरे शहर में जरूरत से ज्यादा नाकेबंदी ठीक नहीं है। अनावश्यक जगहों पर बेवजह यातायात रोककर लोगों को तकलीफ देना गलत है।

उल्लेखनीय है कि कानपुर के श्यामनगर निवासी उषा शर्मा एवं तहादुद हुसैन खान के इकलौता बेटे अमान के सिर पर तीन जुलाई को लोहे का गेट गिर गया। गंभीर रूप से घायल अमान को परिजनों ने अस्पताल ले जाने का प्रयास किया, लेकिन प्रधानमंत्री के दौरे के मद्देनजर जगह-जगह यातायात रोके जाने की वजह से कथित तौर पर उसे अस्पताल ले जाने में देरी हो गई, जिससे उसकी मौत हो गई।

इस मामले में कानपुर के जिलाधिकारी मुकेश मेश्राम ने शुक्रवार को संवाददाताओं से कहा कि मामले की जांच कराई जा रही है।

राज्य के अपर पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) बृजलाल ने आईएएनएस से इस मामले पर कुछ भी कहने से इंकार किया।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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