बिहार में सूखे की आशंका

पटना। अषाढ़ माह बीतने को है और बारिश के आसार नहीं दिख रहे हैं। गया, जहानाबाद, नालंदा, नवादा, औरंगाबाद आदि जिलों के अधिकारियों का कहना है कि पानी के अभाव में खेतों में धान के बीज नहीं डाले गए हैं।

जिन इलाकों में धान के बीज डाले गए हैं वे भी पानी के अभाव में सूख रहे हैं। पानी के अभाव में बिहार के कुछ जिलों में एक बार फिर सूखे की आशंका व्यक्त की जा रही है। आपदा प्रबंधन विभाग का मानना है कि एक पखवाड़े के अंदर अगर अच्छी बारिश नहीं हुई तो कई जिले सूखे की चपेट में आ जाएंगे।

मानसून की बेरुखी का आलम यह है कि भागलपुर में जहां पहले अब तक 204 मिलीमीटर तक बारिश हो जाया करती थी वहां केवल 130 मिलीमीटर बारिश हुई है। कृषि विभाग के अनुसार इस वर्ष अब तक मात्र 2,42,560 हेक्टेयर भूमि की रोपाई के लिए धान के बीज डाले जा सके हैं जबकि लक्ष्य 3,57,500 हेक्टेयर का था। पिछले वर्ष 270000 हेक्टेयर भूमि की रोपाई के लिए धान के बीज डाले गए थे।

अधिकारियों का कहना है कि राज्य में अगर एक सप्ताह तक बारिश नहीं हुई तो सूखे का संकट उत्पन्न हो जाएगा। आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव ब्यासजी के अनुसार राज्य में सूखे का आकलन करने के लिए सरकार ने महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है।

सरकार इस वर्ष भी किसानों को डीजल पर अनुदान देने का विचार कर रही है। प्रस्ताव के मुताबिक पिछले वर्ष किसानों को प्रति लीटर 15 रुपये अनुदान दिया गया था। इस वर्ष अनुदान 20 रुपये करने का प्रस्ताव है। अब देखना ये है कि बारिश की राह तक रहे किसानों को सूखे की मार से बचाने के लिए सरकार की योजनाएं कितनी राहत दे पाती हैं।

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