श्रीनगर में सेना का फ़्लैग मार्च, कर्फ़्यू जारी

भारत प्रशासित कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में कर्फ़्यू जारी है और क़ानून व्यवस्था पर नज़र रखने के लिए सेना को बुलाया गया है. सेना ने श्रीनगर के कुछ इलाक़ों में फ़्लैग मार्च भी किया.
सेना के प्रवक्ता लेफ़्टिनेंट कर्नल जेएस बराड़ ने बताया है कि फ़्लैग मार्च शहर के बाहरी इलाक़ों में ही किया गया है और कहीं भी सेना की तैनाती नहीं की गई है.
अनंतनाग में आठवें दिन भी कर्फ़्यू जारी है. इसके अलावा पुलवामा और कोकपोरा कस्बों में भी कर्फ़्यू लगा हुआ है. कुपवाड़ा और त्रेहगाग के सीमावर्ती कस्बों में भी कर्फ़्यू लगाया गया है.
बारामुला में बड़ी संख्या में लोग घरों से बाहर आकर प्रदर्शन कर रहे हैं. पुलिस ने उन्हें तितर-बितर करने की कोई कोशिश नहीं की है. ज़्यादातर कस्बों में पुलिस ने लोगों के आने-जाने पर कई तरह की पाबंदियाँ लगाई हुई हैं.
हिंसा
कश्मीर में पिछले कई दिनों से विरोध प्रदर्शनों और हिंसा का दौर जारी है और जून के बाद से अब तक पुलिस के साथ झड़पों में 16 लोगों की मौत हो चुकी है.
मंगलवार शाम को पुलिस के साथ झड़प में तीन लोगों की मौत हो गई थी. इसके बाद राज्य सरकार ने सेना की माँगी थी.
इससे पहले राज्य में पुलिस के प्रमुख कुलदीप खुडा ने कहा था कि 'राज्य सरकार ने कुछ संवेदनशील इलाक़ों में सेना से कमान संभालने को का अनुरोध किया है और सूरज की पहली किरण के साथ ही वे वहाँ तैनात हो जाएँगे.'
पिछले महीने सोपोर में दो युवकों के कथित रुप से अर्धसैनिक बलों की गोली से मौत हो जाने के बाद प्रदर्शनों का नया दौर शुरु हुआ.
सेना के अधिकारियों का कहना है कि राज्य सरकार के अनुरोध पर श्रीनगर पर सेना को बुलाया गया है.
राज्य के पुलिस अधिकारियों के मुताबिक अमरनाथ यात्रियों की सुरक्षा के लिए बड़ी संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बलों को तैनात किया गया है इसलिए श्रीनगर और आसपास के इलाक़ों में तैनात करने के लिए सुरक्षा बलों की पर्याप्त संख्या उपलब्ध नहीं है इसीलिए सेना को बुलवाया गया है.
श्रीनगर में बीबीसी के संवाददाता अल्ताफ़ हुसैन का कहना है कि मंगलवार को प्रदर्शनकारियों के साथ हुए व्यवहार से एक बार फिर लगा कि पुलिस को प्रदर्शनकारियों से निपटने का तरीक़ा समझ में नहीं आ रहा है और ऐसा दिखता है कि सरकार के हाथों में बात निकल रही है.












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