नेपाल : राष्ट्रपति ने पार्टियों से 7 जुलाई तक प्रधानमंत्री चुनने को कहा
प्रधानमंत्री माधव कुमार नेपाल के बुधवार को इस्तीफा देने के बाद से देश की शीर्ष तीन पार्टियों के नेताओं के बीच प्रधानमंत्री पद की होड़ शुरू हो गई है।
माओवादी पार्टी ने अन्य पार्टियों के साथ सहमति के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहाल की अध्यक्षता वाली समिति में पार्टी उपनेता और पूर्व वित्त मंत्री बाबूराम भट्टराई तथा मोहन विद्या किरन शामिल हैं। बहरहाल प्रचंड का प्रधानमंत्री पद पर वापस लौटना आसान नहीं है।
दूसरी तरफ माओवादी पार्टी के बाद संसद में दूसरी बड़ी पार्टी नेपाली कांग्रेस भी प्रधानमंत्री पद की दावेदारी से पीछे हटना नहीं चाहती। पूर्व प्रधानमंत्री शेरबहादुर देउबा, पूर्व उप प्रधानमंत्री रामचंद्र पोडेल और कुल बहादुर गुरुं ग के रूप में पार्टी में प्रधानमंत्री पद के तीन दावेदार हैं।
नेपाल की एकीकृत कम्युनिस्ट पार्टी-मार्क्सवादी लेनिनवादी ने भी नई रणनीति के लिए पार्टी की बैठक बुलाई है।
अपनी सरकार गिराने के माओवादियों के प्रयास से एक वर्ष तक जूझने के बाद नेपाल के प्रधानमंत्री माधव कुमार नेपाल ने बुधवार शाम को पद से इस्तीफा दे दिया। राष्ट्र को एक टेलीविजन संबोधन में उन्होंने अपने इस्तीफे की घोषणा की थी।
अपनी 13 महीने पुरानी सरकार के पतन के लिए माओवादियों को जिम्मेदार ठहराते हुए नेपाल ने कहा था कि उनको अब भी संसद में बहुमत हासिल है।
नेपाल ने पद से इस्तीफा देने का फैसला इसलिए किया जिससे अगले सप्ताह शुरू होने जा रहा संसद का सत्र पूर्व गुरिल्लाओं की बाधा के बगैर चल सके।
माओवादियों से सरकार को संवैधानिक संकट से उबरने में मदद मिलने के बाद नेपाल ने इस्तीफा देने का वादा किया था।
नेपाल में 28 मई तक नया संविधान नहीं बनने से सरकार, संसद और संविधान स्वत: समाप्त हो गए थे। इस संवैधानिक संकट से बचने के लिए माओवादियों ने सरकार को संविधान में संशोधन करने और नए संविधान की समय सीमा 12 महीने के लिए बढ़ाने की अनुमति दी थी।
इसके बदले में नेपाल ने 72 घंटे के भीतर इस्तीफा देने का वादा किया था लेकिन संकट दूर होने के बाद वह इस्तीफा देने में टालमटोल कर रहे थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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