जाति आधारित जनगणना पर मंत्री समूह में चर्चा
कांग्रेस तथा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सहित सभी बड़े राजनीतिक दलों में इस मुद्दे पर मतभेद की पृष्ठभूमि में यह बैठक हो रही है।
संसद के बजट सत्र के दौरान समाजवादी पार्टी (सपा), राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और जनता दल (यूनाइटेड) ने जाति आधारित जनगणना का मुद्दा उठाया था।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने संसद में कहा था कि सरकार सदस्यों के रुख से परिचित है और इस मुद्दे पर मंत्रिमंडल फैसला करेगा।
मामले को इसके बाद मुखर्जी की अध्यक्षता वाले मंत्रियों के समूह के हवाले कर दिया गया।
सपा ने पहले ही संकेत दिया है कि इस महीने के अंत में शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र में वह इस मुद्दे को उठाएगी।
लोकसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक शैलेंद्र कुमार ने कहा कि सरकार इस मुद्दे पर पीछे हट रही है और यदि शीघ्र ही कोई फैसला नहीं किया गया तो पार्टी संसद की कार्यवाही रोकेगी।
कुमार ने आईएएनएस से कहा, "सरकार ने जाति आधारित जनगणना पर यदि शीघ्र कोई फैसला नहीं किया तो हम संसद की कार्यवाही नहीं चलने देंगे और एक आंदोलन शुरू करेंगे।"
भाजपा ने पहले जाति आधारित जनगणना का समर्थन किया था लेकिन संघ के विरोध के बाद वह अपने फैसले पर पुनर्विचार कर रही है। पार्टी अध्यक्ष गोपीनाथ मुंडे ने पहले ऐसी जनगणना का समर्थन किया था।
कांग्रेस में भी इस मुद्दे पर विचारों में मतभेद सामने आए। केंद्रीय कानून मंत्री एम.वीरप्पा मोइली ने जहां इसका समर्थन किया वहीं केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय माकन ने पार्टी के युवा सांसदों को एक खुला पत्र लिखकर जाति आधारित जगनणना का विरोध करने का आग्रह किया।
इस मुद्दे पर चर्चा करने वाले मंत्रियों के समूह में केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री फारुक अब्दुल्ला, केंद्रीय शहरी विकास मंत्री एस.जयपाल रेड्डी और रेलमंत्री ममता बनर्जी शामिल हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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