नक्सलवाद और आतंकवाद पर कड़ा रुख अपनाए सरकार : भाजपा
भाजपा प्रवक्ता प्रकाश जावडेकर ने कहा, "सरकार उन सुरक्षाबलों से आतंकवाद के विरूद्घ लड़ाई जीतने की आशा नही कर सकती, जिनके हाथ पीछे बंधे हुए हैं। सरकार सुरक्षाबलों से हमेशा संयम बरतने को तो कहती है पर उन्हें आतंकवादियों के विरूद्घ कड़ी कार्रवाई करने की अनुमति नहीं देती।"
उन्होंने कहा, "आजकल सुरक्षाबल दोनों ओर से भारी दबाव में काम कर रहे हैं। एक ओर उन पर थोड़ी संख्या में किन्तु दृढ़ निश्चय वाले आतंकवादियों द्वारा हमला किए जाने का खतरा बना रहता है, दूसरी ओर उनको मानवाधिकार उल्लंघन के मिथ्या, अभिप्रेरित और पहले से सुनियोजित आरोप पर गिरफ्तार होने का भय बना रहता हैं।"
जावडेकर ने कहा, "हमको स्पष्ट रूप से समझना होगा कि नक्सलवादियों ने राष्ट्र के विरूद्घ लड़ाई छेड़ रखी है। इन मुद्दों के पीछे न कोई भावनाएं है और न ही कोई बाहरी विचार। सुरक्षा बलों और आम जनों पर भीषण हमले करके आतंकवाद को फैलाने का सुनियोजित खेल खेला जा रहा है। संदेश मुखर है और स्पष्ट है कि जो भी नक्सलवादियों का विरोध करेगा उसका सफाया कर दिया जाएगा।"
उन्होंने कहा, "देश की संप्रभुता को दी जा रही इस चुनौती से जूझने की सरकार को राजनीतिक इच्छा दर्शानी चाहिए। सरकार को इस संकट से जूझने के दायित्व को राज्य सरकारों पर डालने का प्रयास नहीं करना चाहिए।"
उन्होंने कहा, "कश्मीर घाटी में अलगाववादियों ने पत्थर फेंकने की एक नई रणनीति अपनाई है, जो लड़ाई करने का 'सस्ता और अधिक असरकारी' तरीका है। चूंकि सुरक्षाबलों ने पिछले कुछ वर्षो में आतंकवादियों के मध्यस्तरीय नेतृत्व का सफाया कर दिया है, अत: आतंकवादी गुटों ने इस नई रणनीति को अपनाया है।"
जावडेकर ने कहा, "प्रतिदिन ट्रकों में पत्थर भरकर विरोध पर उतारू क्षेत्र की गलियों में पहुंचा दिए जाते हैं। किशोरों को पैसे देकर सुरक्षा बलों पर पत्थर फेंकने के लिए फुसलाया जाता है। सुरक्षा बल घायल हो जाते हैं, किंतु मानवाधिकार उल्लंघन के केसों के भय से पलटकर कार्रवाई नहीं कर सकते हैं।"
उन्होंने कहा कि दोनों ही मामलों में केन्द्र सरकार के स्तर पर जो भ्रम मौजूद है, उसके कारण भारी क्षति पहुंची है। इस चुनौती का मुकाबला करने के लिए एकजुट रवैया और कमान अपनाए जाने की जरूरत है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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