जयललिता ने श्रीलंका पर गठित पैनल का स्वागत किया
जयललिता ने एक वक्तव्य जारी कर कहा, "यह बताता है कि एक ऐसे समय में जब तमिलनाडु सरकार और मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि ने श्रीलंका के तमिल लोगों को उनके हाल पर छोड़ दिया है, तब विश्व शांति संस्था और उसके प्रमुख बान की मून को उनकी चिंता है। संयुक्त राष्ट्र प्रमुख का यह कदम हमें इस बात का विश्वास देता है कि तमिल जाति और लोगों के लिए सब कुछ नहीं खोया है।"
संयुक्त राष्ट्र प्रतिनिधिमंडल को वीजा न देने के श्रीलंका सरकार के फैसले की आलोचना करते हुए जयललिता ने कहा, "इसका मतलब है कि अपराध हुआ है। यदि महिंदा राजपक्षे सरकार के पास छुपाने के लिए कुछ नहीं है तो उसे संयुक्त राष्ट्र प्रतिनिधिमंडल को उनके देश में आने की इजाजत देने में कोई आपत्ति नहीं होना चाहिए थी।"
उन्होंने कहा कि मून ने जो समिति बनाई है उसमें इंडोनेशिया, अमेरिका और दक्षिण अफ्रीका के तीन प्रमुख कानून विशेषज्ञ शामिल हैं।
जयललिता ने कहा कि तमिल टाइगर्स के खिलाफ हुई केवल दो दिन की सैन्य कार्रवाई में 50,000 तमिल नागरिक मारे गए थे।
पिछले साल मई में लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) का खात्मा हो गया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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