डाउ ने भारतीय अधिकारियों को घूस में नकदी, गहने दिए थे
नई दिल्ली, 28 जून (आईएएनएस)। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की ओर से दायर एक आरोप पत्र में कहा गया कि भोपाल गैस त्रासदी के बाद यूनियन कार्बाइड का अधिग्रहण करने वाली डाउ केमिकल्स ने अपने खराब गुणवत्ता वाले रसायनिक उत्पादों के भारतीय बाजारों में प्रवेश के लिए केंद्र सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी और उसके सहायकों को 32,000 डॉलर नकदी तथा गहने घूस दिए थे और उसके होटल तथा अन्य खर्चो का भुगतान किया।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने आईएएनएस को बताया कि सीबीआई द्वारा दायर आरोप पत्र में डाउ एग्रो साइंसेज इंडिया लिमिटेड मुंबई द्वारा दी गई घूस का ब्योरा दर्ज है।
यह आरोप पत्र अमेरिकी अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर दायर किया गया है। भारतीय न्यायालय द्वारा अमेरिकी न्यायालय से सहयोग के लिए भेजे गए औपचारिक सहयोग पत्र के जवाब में अमेरिका ने यह जानकारी दी।
सीबीआई के प्रवक्ता हर्ष बहल ने आईएएनएस को बताया कि अमेरिकी सरकार की ओर से डाउ द्वारा 1996 से 2001 के बीच दी गई घूस के ब्योरे के आधार पर कानूनी कार्रवाई की गई।
बहल ने कहा कि सीबीआई ने सरकार के एक पूर्व संयंत्र सुरक्षा सलाहकार रतन लाल रजक और एक मध्यस्थ जिसकी पहचान केवल सत्यब्रत के तौर पर हुई है, के खिलाफ अंबाला में विशेष अदालत में डाउ से घूस लेने का मुकदमा दायर किया है।
डाओ एग्रो के तत्कालीन अध्यक्ष, जो ब्रिटिश नागरिक है और सत्यब्रत से जुड़ी दो कंपनियों एग्रो पैक और क्राप हेल्थ प्रोडक्ट्स लिमिटेड पर भी भ्रष्ट सौदों का आरोप लगाया गया है।
सीबीआई के अनुसार रजक फरीदाबाद स्थित केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड की तीन समितियों का सदस्य था।
अमेरिकी प्रतिभूति और विनिमय आयोग (एसईसी) ने वर्ष 2007 में इस घोटाले को उजागर किया था। इसने यह भी पाया कि डाउ केमिकल्स ने अमेरिका और अन्य देशों में प्रतिबंधित उत्पादों को भारत में बेचने की अनुमति के लिए भारतीय अधिकारियों को 325,000 डॉलर की घूस दी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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