परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह के रुख पर भारत चौकस
एनएसजी की जून 21-25 की बैठक के घटनाक्रमों पर नजदीकी नजर रखने वाले भारतीय अधिकारियों का कहना है किमोटे पर यह भारत के लिए संतोषजनक हैं।
न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च से जारी एक बयान में एनएसजी ने कहा कि समूह ने भारत के साथ असैन्य परमाणु सहयोग के कार्यान्वयन पर विचार करना जारी रखे है। बयान के अनुसार एनएसजी के निर्देशों के अनुरूप की गई कार्रवाई और भारत द्वारा प्रदर्शित स्वैच्छिक प्रतिबद्धता पर ध्यान दिया गया है।
अधिकारियों के अनुसार भारत ने पाकिस्तान को दो अतिरिक्त परमाणु रिएक्टर देने के चीन के प्रस्ताव पर एनएसजी की प्रतिक्रिया को लेकर चौकस है। चीन ने स्पष्ट किया कि यह प्रस्ताव वर्ष 2004 में इस्लामाबाद के साथ हुए एक समझौते का विस्तार है, जब वह एनएसजी का सदस्य नहीं था।
एनएसजी के सार्वजनिक बयान में कहा गया है कि समूह ने गैर एनएसजी देशों से संबद्ध घटनाक्रमों पर ध्यान दिया है। वह मौजूदा परामर्श और पारदर्शिता के महत्व पर सहमत है।
प्रस्तावित पाकिस्तान-चीन समझौते का स्पष्ट उल्लेख न किए जाना चिंता का कारण है हालांकि अधिकारियों का मानना है कि संवर्धन और पुनप्र्रसंस्करण प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण के संबंध में निर्देशों को मजबूत करने का उल्लेख बीजिंग-इस्लामाबाद गठजोड़ का अप्रत्यक्ष हवाला है।
भारतीय अधिकारियों ने कहा, "भारत इकलौता अपवाद है। परंतु हम केवल एनएसजी के घटनाक्रम को देख सकते हैं और निरीक्षण कर सकते हैं। हम एनएसजी का हिस्सा नहीं हैं।"
अधिकारियों के अनुसार जी-20 शिखर सम्मेलन के बाद रविवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कनाडा के प्रधानमंत्री स्टीफन हार्पर की मुलाकात के दौरान यह मामला उठ सकता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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