कश्मीर और आतंकवाद मुख्य मुद्दे
इस्लामाबाद/ नई दिल्ली। भारत और पाकिस्तान के बीच विदेश सचिव स्तर की वार्ता गुरुवार को आरंभ हो गई। इसमें मुख्य रूप से आतंकवाद और कश्मीर का मुद्दा हावी रहने की संभावना है। इनके अलावा अन्य मसलों पर भी चर्चा की जाएगी।
मुंबई आतंकी हमले के बाद द्विपक्षीय वार्ता की बहाली के लिए विश्वास कायम करने की संभावनाएं तलाशने की दिशा में किया गया यह पहला प्रयास होगा। दोनों पक्षों के बीच आतंकवाद, जम्मू एवं कश्मीर विवाद और विश्वास कायम करने के कदमों पर चर्चा होगी।
आतंकवाद के खिलाफ
इस बैठक से इस्लामाबाद में गत 15 जुलाई को होने वाली विदेश मंत्री एस.एम. कृष्णा और पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी की बैठक का आधार तैयार होगा। इस वार्ता के दौरान भारत अपने पड़ोसी देश पाकिस्तान पर दबाव बनाएगा कि वह अपनी धरती पर भारत के खिलाफ रची जाने वाली आतंकी गतिविधियों पर रोक के लिए कड़े कदम उठाए।
इस बातचीत के दौरान भारत 26/11 के आतंकी हमले के सात संदिग्धों के खिलाफ पाकिस्तान में शीघ्र मुकदमे, इन हमलों के षड्यंत्रकारी हाफिज सईद और भारत विरोधी एजेंडे को हवा दे रहे पाकिस्तानी गुटों के खिलाफ ठोस कार्रवाई किए जाने पर जोर देगा।
विश्वास और उपाय
ऐसा माना जा रहा है कि राव सीमा पार घुसपैठ तथा संघर्षविराम के उल्लंघन की हाल ही में घटी घटनाओं का मसला भी उठा सकती हैं। भारत का कहना है कि वह विश्वास कायम करने के उपाय तलाशने के लिए इस वार्ता में शिरकत करने पाकिस्तान जा रहा है जिससे दोनों देशों में द्विपक्षीय वार्ता की बहाली का मार्ग प्रशस्त हो सकेगा।
इस वार्ता के दौरान भारत पाकिस्तान में बंद कैदियों के लिए बनी न्यायिक समिति की जल्द बैठक बुलाने, व्यापक वाणिज्यिक एवं आर्थिक संबंधों को सुधारने तथा सीमा पार व्यापार के लिए कदम उठाने के लिए जैसे उपायों के लिए पाकिस्तान पर दबाव बना सकता है।
इससे पहले बुधवार को विदेश मंत्री एस. एम कृष्णा ने कहा, "हम इस वार्ता से कुछ बहुत बड़ी कामयाबी की उम्मीद नहीं कर रहे हैं। भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध बहुत पेचीदा हैं। इस वार्ता का मकसद मेरी इस्लामाबाद यात्रा से पहले की तैयारी करना है।"












Click it and Unblock the Notifications