दिग्विजय सिंह नहीं रहे (लीड-1)
सिंह के एक सहयोगी ने एस.के. मिश्र ने उनके निधन की पुष्टि की। मिश्र ने बताया, "सिंह ने लंदन के सेंट थॉमस अस्पताल में अंतिम सांस ली।"
पिछले दिनों उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई थी और इसके बाद उन्हें लंदन के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मस्तिष्काघात की वजह से उनका निधन हुआ। उनका जन्म 14 नवंबर, 1955 को हुआ था।
सिंह ने पूर्व प्रधान मंत्री चंद्रशेखर की सरकार में वित्त और विदेश जैसे मंत्रालयों में अहम जिम्मेदारी संभाली। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की सरकार में भी उन्होंने विदेश राज्य मंत्री और रेल राज्य मंत्री के रूप में काम किया।
वह वर्ष 1990 में पहली बार राज्यसभा के लिए चुने गए थे। इसके बाद वह बांका से पहली बार वर्ष 1998 में लोकसभा के लिए चुने गए। पिछले लोकसभा में चुनाव में वह बांका संसदीय क्षेत्र से ही बतौर निर्दलीय उम्मीदवार निर्वाचित हुए थे।
राजनीतिक हलकों में उनके निधन पर गहरा शोक व्याप्त है। नेताओं ने सिंह के निधन को केवल बिहार ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए अपूर्णीय क्षति करार दिया है। केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के बिहार प्रभारी मुकुल वासनिक ने कहा कि सिंह का निधन देश की राजनीति के लिए एक बड़ी क्षति है।
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) अध्यक्ष एवं पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने सिंह के निधन को व्यक्तिगत क्षति बताया। उन्होंने कहा, "ऐसे समय में इस तरह के मजबूत नेता का चले जाना केवल मेरी ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए अपूर्णीय क्षति है। वह पांच बार सांसद रहे और उन्होंने संसद में मजबूती व बेबाकी से बिहार की समस्याओं को उठाया। उनका निधन बिहार के लिए भी एक बड़ी क्षति है।"
लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के अध्यक्ष रामविलास पासवान ने कहा, "यह एक चौंकाने वाली खबर है। वह काफी लोकप्रिय नेता थे। उनकी लोकप्रियता का प्रमाण इसी से मिल जाता है कि पिछले लोकसभा चुनाव में उन्होंने बांका से बतौर निर्दलीय जीत दर्ज की। इस दुख की घड़ी में भगवान उनके परिजनों को हिम्मत दे।"
जनता दल (युनाइटेड ) के बिहार इकाई के अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी ने सिंह के निधन को बड़ी क्षति बताया। उन्होंने कहा कि सिंह सही दिशा में राजनीति को बढाने वाले नेता रहे हैं। इस दुखद समाचार से पूरा बिहार स्तब्ध है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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