भाजपा-नीतीश विवाद पर असमंजस बरकरार (राउंडअप)
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा गुजरात सरकार की ओर से कोसी बाढ़ आपदा के लिए दी गई राहत राशि लौटाए जाने के बाद चौदह वर्ष पुराने गठबंधन में आई दरार के मद्देनजर मंगलवार को भाजपा कोर ग्रुप की बैठक बुलाई गई थी। बैठक में भाजपा की बिहार इकाई के वरिष्ठ नेताओं को विशेष तौर पर आमंत्रित किया गया था।
बैठक के बाद भाजपा प्रवक्ता शहनवाज हुसैन ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, "बैठक में कोई फैसला नहीं हो पाया है। बुधवार को पार्टी पदाधिकारियों से चर्चा के बाद इस मुद्दे पर कोई फैसला लिया जाएगा।"
सूत्रों के अनुसार बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार चाहते हैं कि राज्य में नवंबर महीने में होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा के नरेन्द्र मोदी और वरूण गांधी राज्य में प्रचार करने नहीं आए। यह भाजपा के लिए गंभीर समस्या है कि वे अपने स्टार प्रचारक को प्रचार से अलग कैसे रखे।
उधर पटना में बिहार मंत्रिमंडल की मंगलवार को हुई बैठक में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के 12 में से सिर्फ चार मंत्रियों ने हिस्सा लिया। पूर्व में यह माना जा रहा था कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल (युनाइटेड) के रिश्ते में चल रहे खटास के कारण भाजपा के मंत्री मंत्रिमंडल की बैठक में भाग नहीं लेंगे।
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता की माने तो राज्य के उपमुख्यमंत्री एवं भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी ने दिल्ली जाने के पूर्व उन सभी मंत्रियों को मंत्रिमंडल की बैठक में जाने का निर्देश दिया था जो पटना में उपस्थित रहेंगे। हालांकि मंत्री गिरीराज सिंह ने दोपहर तक पटना में रहने के बावजूद मंत्रिमंडल की बैठक में भाग नहीं लिया। सिंह दोपहर के बाद निजी कार्य बताते हुए मुजफ्फरपुर के लिए रवाना हो गए।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री ने बिहार में बाढ़ पीडितों के लिए गुजरात से आई सहायता राशि को लौटा दिया था और चौदह वर्ष पूर्व बने इस गठबंधन में गांठ पड़ गई। इधर, बाढ़ प्रभावित इलाके के लोग बाढ़ सहायता राशि वापस किये जाने से नाराज हैं। लोगों का कहना है कि बाढ़ सहायता राशि पर राजनीति नहीं करनी चाहिये।
इधर, राजनीति विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश कुमार मुसलमान मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए भाजपा से दूरी दिखाने चाहते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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