देश में प्रशिक्षित परियोजना प्रबंधकों की कमी : जायसवाल

उन्होंने कहा कि सरकार परियोजना प्रबंधन को विशिष्ट क्षेत्र के रूप में मान्यता देने के लिए तथा इसे प्रबंधन अध्ययनों की महत्वपूर्ण धारा के रूप में विकसित करने के लिए सांस्थानिक व्यवस्था करने के वास्ते नीतिगत समर्थन उपलब्ध कराएगी।

आज यहां सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की ओर से आयोजित 'परियोजना प्रबंधकों के प्रमाणन पर राष्ट्रीय विमर्श' को संबोधित करते हुए जायसवाल ने कहा कि भारत के विकास की कहानी मुख्यरूप से इसके विशाल ढांचागत कार्यक्रम के प्रभावी प्रबंधन पर निर्भर करती है तथा यह प्रमुख परियोजनाओं के सफल और समय से पूरा होने पर भी विशेष रूप से निर्भर है।

उन्होंने कहा कि इसीलिए भारत में आगामी वर्षो में सकल घरेलू उत्पाद की उच्च विकास दर के लिए बेहतरीन प्रबंधन व्यवहारों को सीखना और उनका इस्तेमाल करना बहुत महत्वपूर्ण है।

केन्द्रीय क्षेत्र की कुछ परियोजनाओं के पूरा होने में समय और लागत बढ़ने पर चिंता प्रकट करते हुए श्रीप्रकाश जायसवाल ने कहा कि यह एक प्रमुख समस्या है जो इन परियोजनाओं को प्रभावित कर रही है। तथापि उनके मंत्रालय की निगरानी के कारण परियोजनाओं की बढ़ती लागत दिसंबर 2009 में घटकर 13़ 9 प्रतिशत रह गई जो 1991 में 62 प्रतिशत थी।

उन्होंने कहा कि सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय समय और लागत बढने के मसले से निपटने तथा सही कार्रवाई करने का सुझाव देने के संबंध में 16 प्रमुख ढांचागत क्षेत्रों में मासिक आधार पर केन्द्रीय क्षेत्र की परियोजनाओं की निगरानी कर रहा है।

अनुमान है कि देश में विभिन्न क्षेत्रों में करीब 1़8 लाख परियोजना प्रबंधक हैं। करीब 20,000 परियोजना प्रबंधक विभिन्न एजेंसियों से प्रमाणित हैं। भारत में परियोजना प्रबंधकों की संख्या प्रतिवर्ष करीब 36,000 की दर से बढ रही है लेकिन देश में आवश्यकता के अनुसार प्रशिक्षित एवं प्रमाणित परियोजना प्रबंधकों की अब भी कमी है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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