हमने सब कुछ अल्लाह पर छोड़ा : अफजल के परिजन
अफजल के रिश्तेदार ने अपना नाम जाहिर न करने की इच्छा जताते हुए आईएएनएस से कहा, "हमें इस घटनाक्रम की जानकारी नहीं है। हम नहीं जानते कि गृहमंत्रालय ने ऐसा कोई फैसला किया है।"
बुधवार को प्रकाशित एक रपट में कहा गया कि सरकार ने राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील से अफजल की दया याचिका खारिज करने को कहा है। अफजल को वर्ष 2001 के संसद हमले के सिलसिले में सजा-ए मौत सुनाई गई है।
सरकार द्वारा उसे फांसी देने पर जल्दबाजी न करने का भरोसा व्यक्त करते हुए अफजल के रिश्तेदार ने कहा, "हमने सब कुछ अल्लाह पर छोड़ दिया है। वह बेहतर इंसाफ कर सकते हैं। हमें पक्का यकीन है कि उसकी किस्मत लिखी जा चुकी है और हमने खुद को खुदा की मर्जी पर छोड़ दिया है।"
राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका दाखिल करने वाली अफजल की पत्नी तबस्सुम से बात करने की कोशिश नाकाम रही क्योंकि उसने मीडिया से बात करने से इंकार कर दिया।
श्रीनगर से 50 किलोमीटर दूर सोपोर के एक नर्सिग होम में कार्यरत उक्त रिश्तेदार ने कहा, -"माफ कीजिएगा, प्यारी (तबस्सुम) बात नहीं कर सकती। वह इस हालत में ही नहीं है।"
अफजल के रिश्तेदार ने बताया कि 40 वर्षीय गुरु ने गृहमंत्रालय से लिखित अनुरोध किया था कि उसकी रहम याचिका को जल्द निपटाया जाए। उसका कहना था कि तिहाड़ जेल की काल कोठरी में बरसों तक अकेले रहना उस पर भारी पड़ रहा है।
अफजल को वर्ष 2002 में मृत्युदंड सुनाया गया था। वर्ष 2005 में सर्वोच्च न्यायालय ने उसकी सजा-ए मौत बरकरार रखी थी। उसे 20 अक्टूबर 2006 को फांसी दी जानी थी लेकिन उसकी पत्नी ने रहम की याचिका दाखिल कर दी।
अफजल की रहम याचिका राष्ट्रपति के पास लंबित 28वीं रहम याचिका है। प्रक्रिया के अनुरूप राष्ट्रपति ने इस याचिका पर केंद्रीय गृहमंत्रालय की राय मांगी थी। केंद्रीय गृहमंत्रालय ने इस पर दिल्ली सरकार की राय मांगी थी।
दिल्ली सरकार ने इस महीने के आरंभ में अपनी राय के साथ यह फाइल केंद्रीय गृह मंत्रालय को लौटा दी थी। दिल्ली सरकार ने अफजल को फांसी पर लटकाने की सिफारिश की थी लेकिन साथ ही यह भी कहा था कि कानून एवं व्यवस्था की स्थिति को ध्यान में रखा जाए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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