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गैस पीड़ितों का गुरुवार को दिल्ली में प्रदर्शन

भोपाल गैस पीड़ितों के लिए काम कर रहे विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने बुधवार को संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा कि मंत्री समूह की सिफारिशों से सिर्फ 10 प्रतिशत गैस पीड़ितों को ही लाभ मिलने वाला है। इन सिफारिशों मे जहां डाउ कैमिकल को बचाने की कोशिशें की गई हैं वहीं पीड़ितों को छला गया है।

पीड़ित संगठनों का आरोप है कि मंत्री समूह ने सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों से पहले तय की गई श्रेणियों को आधार बनाकर सिफारिशें की हैं। इसके चलते सिर्फ 5295 मृतकों के आश्रितों और 42 हजार पीड़ितों को ही लाभ मिल सकेगा, जबकि सर्वोच्च न्यायालय ने मृतकों की संख्या 15 हजार तथा घायलों की संख्या पांच लाख मानी है और उसी आधार पर मुआवजा दिलाया है।

गौरतलब है कि सिफारिशों का विरोध कर रहे इन्हीं संगठनों ने मंत्री समूह की सिफारिशों का पहले स्वागत किया था। गैस पीड़ितों के लिए काम कर रही रचना ढींगरा का कहना है कि जब सिफारिशें की गई थीं तब उन्हें बताया गया था कि सभी पीड़ितों को लाभ मिलेगा लिहाजा संगठनों ने अपनी आरंभिक प्रतिक्रिया में इसका स्वागत किया था। पुनर्विचार याचिका दायर करने सहित अन्य सिफारिशों का सिर्फ इसलिए स्वागत किया गया था क्योंकि हकीकत का खुलासा ही नहीं किया गया था। अब तस्वीर सामने आ रही है कि सिर्फ 10 प्रतिशत गैस पीड़ित ही लाभान्वित होने वाले हैं।

मालूम हो कि मंत्री समूह की सिफारिशों पर मंत्रिमंडल द्वारा 25 जून को फैसला लिया जाना है, इसलिए गैस पीड़ित और भू-जल प्रभावित परिवारों ने इससे पहले 24 जून को प्रधानमंत्री निवास व कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है। ताकि सरकार किसी तरह का फैसला लेने से पहले पीड़ितों के दर्द को जान सके।

गैस पीड़ित संगठनों का आरेाप है कि मंत्री समूह की सिफारिशों से साफ लगता है कि उन्होंने डाउ कैमिकल को बचाने की कोशिश की है। वहीं फरार चल रहे वारेन एंडरसन के अलावा दो अन्य कंपनियों यूनियन कार्बाइड हांगकांग और यूनियन कार्बाइड यूएस के संदर्भ में कोई चर्चा तक नहीं की गई है। इसके अलावा पीड़ितों के पुनर्वास के लिए 720 करोड़ रुपये देने की बात कही गई है, जिसमें से राज्य सरकार 530 करोड़ पहले ही खर्च कर चुकी है।

गैस पीड़ित संगठनों का कहना है कि सरकार को किसी तरह का फैसला लेने से पहले उनका भी पक्ष सुनना चाहिए। प्रधानमंत्री कार्यालय व निवास पर प्रदर्शन कर पीड़ित इस मांग को प्रमुखता से उठाएंगे।

संगठनों का आरोप है कि केंद्र सरकार ने गैस पीड़ितों के साथ एक बार फिर विश्वासघात किया है। इन सिफारिशों से सिर्फ कुछ लोग ही लाभान्वित होंगे और बहुसंख्यक फिर दुर्दशा का शिकार बनेंगे।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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