10 फीसदी विकास दर का लक्ष्य: मुखर्जी
वाशिंगटन, 22 जून (आईएएनएस)। राजकोषीय घाटे और महंगाई पर काबू पाने में विफल रहने के बावजूद भारत सरकार ने वर्ष 2012 में विकास की दर दहाई अंक में पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है।
यहां 'इंस्टीट्यूट ऑफ ग्लोबल फाइनेंस' में अपने एक संबोधन में वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा, "भारत उच्च विकास के मार्ग पर लौट गया है।"
वर्ष 1980 के अंतर्राष्ट्रीय ऋण संकट के बाद इस संस्थान की स्थापना औद्योगिक देशों के 38 प्रमुख बैंकों ने वर्ष 1983 में की थी।
मुखर्जी भारत-अमेरिका सीईओ फोरम की मंगलवार को होने वाली बैठक के लिए एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल की अध्यक्षता कर रहे हैं। प्रतिनिधिमंडल में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री आनंद शर्मा और योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया शामिल हैं।
अपने प्रवास के दौरान वह अमेरिकी वित्त मंत्री टिमोथी गेथनर से द्विपक्षीय वार्ता करेंगे।
मुखर्जी ने कहा कि वैश्विक वित्तीय संकट के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था लगातार चार वर्षो तक नौ फीसदी की दर से विकास करने के बाद वर्ष 2008-09 में 6.7 फीसदी की विकास दर हासिल की। लेकिन वित्त वर्ष 2009-10 में इसने वापसी की और 7.4 फीसदी की विकास दर हासिल किया। चालू वित्त वर्ष में इसके 8.5 फीसदी रहने का अनुमान है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने हालांकि 8.8 फीसदी विकास दर का अनुमान लगाया है।
वित्त मंत्री ने कहा कि अर्थव्यवस्था को विकास के मार्ग पर सरपट दौड़ाने के लिए घरेलू मांग बढ़ाने पर जोर देना होगा।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2011-12 में विकास दर नौ फीसदी रहने की उम्मीद है लेकिन मेरा लक्ष्य इसे दहाईं अंक की विकास दर वाला वर्ष बनाने की है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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