कृषि पैदावार बढ़ाना जरूरी : प्रधानमंत्री
पंतनगर (उत्तराखण्ड), 19 जून (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शनिवार को कहा कि देश की बढ़ती आबादी को खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित कराने के लिए कृषि उपज बढ़ाया जाना आवश्यक है। इतना ही नहीं देश सही मायनों में तब तक समग्र विकास नहीं हो सकता, जब तक कृषक और विशेषकर छोटे व सीमांत किसान लाभान्वित न हों।
गोविंद वल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा कि कृषि क्षेत्र में निवेश बढ़ाने, बड़े भू-भाग को सिंचित क्षेत्र के दायरे में लाने, कृषि विपणन में सुधार लाने और किसानों को उपज का बेहतर मोल तथा उत्तम गुणवत्ता के बीज मुहैया कराने की जरूरत है।
सिंह ने कहा कि हमें कृषि की विकास दर को करीब दो फीसदी से बढ़ाकर चार फीसदी सालाना करने के लिए व्यापक प्रयास करने होंगे।
उन्होंने कहा, "आमतौर पर समझा जाता है कि 1960 के दशक के आखिरी वर्षो की हरित क्रांति के बाद से कृषि संबंधी प्रौद्योगिकियों में कोई बड़ी कामयाबी नहीं मिली है। यह भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर), हमारे कृषि विश्वविद्यालयों और हमारे कृषि वैज्ञानिकों के समक्ष बड़ी चुनौती है।"
सिंह ने कहा कि हमें एक ऐसी प्रणाली की जरूरत है जो बेहतर तकनीकों को सहज और अविलंब तरीके से किसानों तक पहुंचा सकें। उन्होंने कहा कि हमें एक उपयुक्त सूचना प्रौद्योगिकी तंत्र विकसित करने की जरूरत है, जिसके माध्यम से किसान फसलों और उनकी किस्मों, बेहतर तकनीकों, बाजार भाव, मांग एवं आपूर्ति के अंतर आदि की जानकारी हासिल कर सकें।
प्रधानमंत्री ने कहा कि जैव विविधता के संरक्षण और खाद्य उत्पादन बढ़ाने में संतुलन कायम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड की पारिस्थितिकी बेहद संवेदनशील है। उन्होंने कहा कि पर्वतीय इलाकों में कृषि विकास के लिए विशेष नजरिए की आवश्यकता होती है, जो पारिस्थितिकी के प्रति संवेदनशील हो।
सिंह ने कहा कि हिमालय को विजातीय प्रजातियों की घुसपैठ से बचाने की जरूरत है। उसकी जैव विविधता को उसके मूल पर्यावास में ही फलने-फूलने देना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि वह चाहते हैं कि देश के कृषि विश्वविद्यालय ज्यादा जानकारियां और फसल के बाद की तकनीकों के कौशल विकसित करें, ताकि कृषि में ज्यादा मूल्य संवर्धन और बेहतर वैविध्य संभव हो सके। इससे हमारे श्रमिक बल को कृषि से हटाकर गैर कृषि गतिविधियों की ओर मोड़ा जा सके और इस प्रक्रिया में दोनों क्षेत्र लाभांवित होंगे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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