आज भी चुनौती समझे जाते हैं ज्ञानेंद्र
काठमांडू, 18 जून (आईएएनएस)। नेपाल में राजशाही के खात्मे के दो बरस बाद भी, अपदस्थ नरेश ज्ञानेंद्र को सत्तारूढ़ दल चुनौती के रूप में देखते हैं।
एक हिंदू मंदिर के उद्घाटन के अवसर पर पूर्व नरेश को आमंत्रित करने के कारण नेपाल के प्रधानमंत्री माधव कुमार नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल-यूनीफाइड मार्क्सिस्ट एंड लेनिनिस्ट (सीपीएन-यूएमएल) ने दक्षिणी तराई के बारा जिले के असरदार नेता अमर यादव को बर्खास्त कर दिया।
यादव ने बुधवार को शुरू होने वाली 'धर्मयात्रा' के लिए अंतिम शासक को चार दिन का निमंत्रण भेजा था।
यह निमंत्रण उस समय खासतौर पर विवादों से घिर गया जब मीडिया में यह खबरे आईं कि बतौर राष्ट्राध्यक्ष नरेश का स्थान लेने वाले राष्ट्रपति राम बरम यादव परवानीपुर में वैष्णो देवी के इस मंदिर के उद्घाटन के इच्छुक हैं।
अमर यादव की अध्यक्षता वाले मंदिर प्रबंधन ने लेकिन पूर्व नरेश को ही आमंत्रित किया।
बुधवार को ज्ञानेंद्र ने मंदिर का उद्घाटन किया और वह इस समय तीर्थयात्रा पर हैं जो दो और तराई जिलों को कवर करेगी।
विवाद उस समय और भी बढ़ गया जब यादव ने हिंदूवाद को राष्ट्र धर्म बहाल करने की मांग का समर्थन किया। उन्होंने कथित तौर पर कहा, "मैं हिंदू पहले और कम्युनिस्ट बाद में हूं।"
सीपीएम-यूएमएल पार्टी किसी धर्म में विश्वास नहीं रखती और उसने वर्ष 2006 में नेपाल को धर्मनिरपेक्ष बनाने के आह्वान का समर्थन किया था।
पिछले साल यूएमएल नेता नेपाल ने प्रधानमंत्री बनने के बाद ईश्वर के नाम पर शपथ लेने की बजाए सिर्फ यही कहा था कि 'मैं शपथ लेता हूं'
अपदस्थ किए जाने के बाद हिंदू बहुल तराई क्षेत्र में ज्ञानेंद्र की यह तीसरी सार्वजनिक यात्रा है। उन्हें लगातार मिल रहा शाही परिवारों और परंपरावादियों का समर्थन नेपाल की सत्तारूढ़ पार्टियों के लिए चिंता का विषय है।
इसके अलावा राजनीतिक दलों में सत्ता की हो रही खींच-तान को लेकर जनता में नाराजगी बढ़ती जा रही है। वे दो बरस के भीतर नया संविधान तैयार करने में भी विफल रहे हैं और उसके लिए समयसीमा एक साल बढ़ाने के एक महीने बाद भी वे किसी समझौते तक नहीं पहुंच पाए हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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