किर्गिस्तान हिंसा में 179 मरे, भारतीयों को जल्द स्वदेश लाया जाएगा (राउंडअप)

इस बीच किर्गिस्तान के प्रमुख दक्षिणी शहरों ओश और जलालाबाद के हिंसाग्रस्त इलाकों से राजधानी बिश्केक में सुरक्षित लाए गए भारतीय छात्रों की जल्द स्वदेश वापसी के लिए भारत सरकार टिकट और पासपोर्ट मुहैया करा रही है।

मंगलवार की रात भर किर्गी और उज्बेक गुटों में झड़पे हुईं, जिनमें ग्रेनेड भी इस्तेमाल किए गए। अंतरिम सरकार ने बुधवार को कहा कि इनकी वजह से इस मध्य एशियाई गणराज्य में शरणार्थी संकट तेजी से बढ़ता जा रहा है।

समाचार एजेंसी डीपीए के अनुसार आधिकारिक आंकड़ों में दो समुदायों के बीच हिंसा में आधिकारिक आंकड़ों से कहीं ज्यादा लोगों के मारे जाने की आशंका हैं।

ओश और जलालाबाद शहरों में बुधवार तड़के हालात बहुत तनावपूर्ण बने हुए थे। किर्गी संवाद एजेंसी एकेआईप्रेस के अनुसार ओश और जलालाबाद के बहुत से रिहायशी इलाके राहतकर्मियों और पुलिस अधिकारियों भरे पड़े हैं।

मास्को में किर्गिस्तान सुरक्षा परिषद के प्रमुख एलिक ओरोसोव हिंसा पर काबू पाने के लिए संभावित सैन्य तैनाती के मसले पर रूस के साथ वार्ता करने वाले हैं।

मास्को में अमेरिकी दूतावास के अनुसार अमेरिकी राजनयिक रॉबर्ट ब्लेक इस संकट पर चर्चा के लिए बिश्केक पहुंचने वाले हैं।

अमेरिका और रूस दोनों के किर्गिस्तान सैन्य ठिकाने हैं। ओरोसोव संकट पर चर्चा के लिए रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से मुलाकात करेंगे।

नरसंहार निरोधक मामलों के संयुक्त राष्ट्र के परामर्शदाता एडवर्ड लक ने कहा कि उज्बेकों को निशाना बनाया जाना जाति विशेष का सफाया किए जाने के समान है।

किर्गिस्तान में गत अप्रैल में राष्ट्रपति कुर्मानबेक बाकियेव को बर्खास्त किए जाने पर जातीय तनाव उत्पन्न हो गया था। किर्गी और उज्बेक समुदाय एक-दूसरे के विरूद्ध उठ खड़े हुए थे।

लक के अनुसार इस हिंसा की वजह से बड़ी संख्या में उज्बेक विस्थापित हो रहे हैं जो जातीय सफाया किए जाने के समान है।

इस हिंसा पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने भी चिंता जाहिर की है। सोमवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने वहां कानून एवं व्यवस्था कायम करने का अनुरोध किया था।

इस बीच बाकियेव के पुत्र ने ब्रिटेन से राजनीतिक शरण मांगी है।

उधर, मानवाधिकार संगठन एमेस्टी इंटरनेशनल ने भी किर्गिस्तान के सभी पड़ोसी देशों-उज्बेकिस्तान, ताजिकिस्तान, कजाकिस्तान और चीन से शरणार्थियों के लिए सीमाएं खोल देने का अनुरोध किया है।

इस बीच मून ने मंगलवार को किर्गिस्तन की अंतरिम प्रधानमंत्री रोजा ओतुनबायेवा और रूसी के विदेश मंत्री लावरोव से फोन पर बातचीत की। मून इस समय सिएरा लियोन में हैं।

राहत और बचाव कार्यरे के समन्वयन के लिए मून ने विशेष प्रतिनिधि के रूप में मीरोसोव जेंका को भेजा है।

भारतीयों को टिकट मुहैया करा रही है सरकार

नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विष्णु प्रकाश ने कहा, " हिंसाग्रस्त इलाकों में फंसे भारतीयों को सुरक्षित निकालने के लिए सरकार चिंतित है।"

उन्होंने कहा, "विशेष विमान से सभी भारतीय छात्रों को हिंसा ग्रस्त क्षेत्रों से निकाला जा चुका है और वे बिश्केक पहुंच चुके हैं।"

विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि किर्गिस्तान के हिंसाग्रस्त इलाकों में पहले 116 भारतीय छात्रों के फंसे होने का अनुमान लगाया गया था जो कि सही नहीं है, वहां फंसे 105 छात्रों को सुरक्षित राजधानी बिश्केक पहुंचाया गया है।

बिश्केक पहुंचे कुछ छात्रों ने शिकायत की थी कि भारतीय दूतावास के अधिकारी उनसे कठोर व्यवहार कर रहे हैं। एक पत्रकार से उन्होंने कहा कि उन्हें यहां लाए जाने के बाद उन्हें सोने के लिए भी जगह नहीं दी गई है।

विदश मंत्रालय ने कहा, "उनके रहने और खाने की व्यवस्था की गई है। ये व्यवस्थाएं किर्गिस्तान के अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय में की गई हैं।"

अधिकारियों ने कहा कि दूतावास की प्रक्रिया के अनुरूप ऐसे छात्रों को टिकट खरीदने का प्रस्ताव दिया गया है जो तात्कालिक रूप से आर्थिक परेशानी में हैं।

उन्होंने कहा, "यहां की सरकार के नियमों के मुताबिक दूतावास उन्हें आपात सर्टिफिकेट के आधार पर पासपोर्ट और हवाई टिकट मुहैया करा रहा है।"

प्रवक्ता ने कहा कि व्यावसायिक और चार्टर उड़ानें सामान्य रूप से चल रही हैं और भारतीय दूतावास छात्रों को यात्रा के संबंध में सभी तरह की सहायता उपलब्ध करा रहा है।

उन्होंने कहा, "कुछ छात्र बिश्केक में ही रुकना चाहते हैं जबकि कुछ छात्र गर्मी की छुट्टियों में भारत वापस आना चाहते हैं।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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