अमेरिका ने चीन-पाकिस्तान परमाणु करार का विरोध किया
अरुण कुमार
वाशिंगटन, 16 जून (आईएएनएस)। अमेरिका ने कहा है कि वह चीन और पाकिस्तान के बीच प्रस्तावित परमाणु करार का विरोध करेगा क्योंकि उसे भी परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) से वही विशिष्ट छूट हासिल करनी होगी जैसी भारत-अमेरिका परमाणु करार के समय ली गई थी।
अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता पी. जे. क्राउले से मंगलवार को जब संवाददाताओं ने पूछा कि वह किस आधार पर इस प्रस्तावित करार का विरोध करेंगे जबकि अमेरिका ने ऐसा ही करार भारत के साथ किया है। इसके जवाब में उन्होंने कहा, "यह चीन की सदस्यता की मंजूरी के दौरान दिए गए सहयोग के दायरे से बाहर प्रतीत होता है।"
उन्होंने कहा, "हमारा मानना है कि इस प्रकार के सहयोग को एनएसजी द्वारा आम सहमति से एक विशिष्ट छूट की आवश्यकता होगी जैसा कि भारत के साथ किया गया था। इसलिए हम दोनों के बीच कोई अंतर नहीं देख रहे हैं।"
उन्होंने चीन से पाकिस्तान को बेचे जाने वाले अतिरिक्त परमाणु रिएक्टरों का विस्तृत ब्योरा स्पष्ट करने को कहा।
अमेरिका ने सूचना जारी कर कहा है कि अगले सप्ताह 46 देशों के एनएसजी समूह की बैठक में वह इस करार का विरोध करेगा। यह समूह परमाणु व्यापार को नियंत्रित करता है और साथ ही जिन देशों ने परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं उन्हें परमाणु तकनीक बेचे जाने पर रोक लगाता है।
एनएसजी में भारत को अमेरिका के साथ परमाणु करार के मामले में छूट मिली थी क्योंकि अमेरिका और अन्य देशों ने भारत के त्रुटिहीन परमाणु अप्रसार के रिकार्ड को देखते हुए पूरा समर्थन किया था।
लेकिन पाकिस्तान को इसी प्रकार का अंतर्राष्ट्रीय समर्थन मिलना संभव नहीं लगता क्योंकि परमाणु अप्रसार के मामले में उसका दोहरा चरित्र सामने आता रहा है।
क्राउले से जब यह पूछा गया कि क्या चीन ने अमेरिका को यह सूचना दी है कि वह पाकिस्तान को दो परमाणु रिएक्टर बेच रहा है। इस बारे में उन्होंने कहा, "इस मामले पर पिछले कुछ समय से हम अक्सर चीन से बात करते रहे हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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