भोपाल पर बैठक 18 जून को: चिदंबरम

गृह मंत्री पी चिदंबरम ने कहा है कि भोपाल गैस कांड पर बना मंत्रीसमूह 18 जून को बैठक करेगा.
एक दिन पहले सोमवार को ही प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने निर्देश दिया था कि पुनर्गठित मंत्रीसमूह 10 दिनों के अंदर कैबिनेट को भोपाल मामले पर अपनी रिपोर्ट सौंपे.
दिल्ली में आर्थिक मामलों पर कैबिनेट समिति( सीसीए) की बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में चिंदबरम ने बताया कि बैठक 18 जून को होगी.
ये पूछे जाने पर कि क्या इस बैठक में वॉरन एंडरसन के प्रत्यर्पण का मुद्दा शामिल होगा तो गृह मंत्री ने कहा कि उन्हें जानकारी नहीं है कि किन-किन मुद्दों पर विचार- विमर्श होगा.
उनका कहना था, “मुझे पता नहीं है. देखना पड़ेगा कि रसायन और पेट्रो-केमिकल मंत्रालय क्या दस्तावेज़ भेजता है. मंत्रालय ने कहा है कि वो बुधवार तक दस्तावेज़ भेजेगा. फिर देखते हैं कि कौन-कौन से मामले उठाए जाते हैं. उसी के हिसाब से तय किया जाएगा कि कौन से अतिरिक्त विषयों पर बात होनी चाहिए.”
भोपाल गैस कांड पर अदालत का फ़ैसला आने के बाद पिछले हफ़्ते प्रधानमंत्री ने नौ सदस्यों वाले मंत्रीसमूह(जीओएम) का गठन किया था जिसकी अध्यक्षता पी चिदंबरम कर रहे हैं.
जीओएम से कहा गया है कि वो ये बताए कि भोपाल की निचली अदालत के फ़ैसले के संदर्भ में सरकार के पास क्या विकल्प हैं.
मंत्रीसमूह का गठन इसलिए किया गया है ताकि पीड़ितों को राहत और पुनर्वास जैसे मु्द्दों पर ध्यान दिया जा सके.
चुप्प हैं अर्जुन सिंह
इस बीच भोपाल कांड को लेकर कांग्रेस और भाजपा में आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है.जबकि गैस त्रासदी के समय मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रहे अर्जुन सिंह ने चुप्पी साधे हुई है कि आख़िर वॉरन एंडरसन कैसे भारत छोड़कर जाने में सफल रहे.
हालांकि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी आरोपों से घिरे मुख्यमंत्री अर्जुन सिहं के बचाव में आगे आए हैं.
प्रणव मुखर्जी ने कहा है कि वॉरेन एंडरसन को छोड़ने का फ़ैसला भोपाल की क़ानून व्यवस्था को ध्यान मे रख कर किया गया था.
भोपाल गैस कांड में यूनियन कार्बाइड के तत्कालीन प्रमुख वॉरेन एंडरसन फ़रार घोषित किये गए थे.
इसी महीने भोपाल की निचली अदालत ने 26 साल पुराने भोपाल गैस कांड पर फ़ैसला सुनाते हुए सात दोषियों को दो-दो साल की सज़ा सुनाई है.












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