अर्जुन ने दिल्ली से आए फोन पर एंडरसन को छोड़ा : पटवा

उल्लेखनीय है कि यूनियन कार्बाइड इंडिया से दो-तीन दिसंबर 1984 की रात को रिसी जहरीली गैस ने हजारों लोगों को लील लिया था। उस समय भाजपा के विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे पटवा ने सोमवार को संवाददाता सम्मेलन में तत्कालीन केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला।

उन्होंने कहा कि जिस रात यह हादसा हुआ था, तब वे जबलपुर के दौरे पर थे। उसके बाद भेापाल में एंडरसन की गिरफ्तारी हुई और कुछ घंटों बाद ही उसे जमानत दे दी गई और प्रदेश सरकार के विमान से उसे दिल्ली भेज दिया गया।

पटवा का दावा है कि यह सब दिल्ली से आए एक फोन के चलते तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह ने किया था। काफी कुरेदने के बाद भी वह किसी का नाम लेने को तैयार नहीं हुए, मगर इतना जरूर कहा कि वह फोन तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी या अरुण नेहरू का हो सकता है।

उन्होंने आगे कहा कि अर्जुन सिंह को चुप्पी तोड़ देनी चाहिए और यह बताना चाहिए कि उन्होंने किसके फोन पर एंडरसन को छोड़ा। उन्हें आशंका यह है कि अमेरिका से दिल्ली और फिर दिल्ली से अर्जुन सिंह को फोन आया होगा।

भोपाल गैस त्रासदी के बाद भाजपा भी सत्ता में आई और उसने एंडरसन के मुद्दे पर क्या कार्रवाई की, इस सवाल पर उन्होंने कहा कि पूरा मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपा जा चुका था। लिहाजा, उनकी सरकारों ने पुनर्वास और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार जैसे मुद्दों पर काम किया।

एंडरसन को जमानत देकर हवाई अड्डे पर ले जाकर सरकारी वाहन से छोड़ने वाले तत्कालीन पुलिस अधीक्षक स्वराज पुरी वर्तमान में नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के सदस्य हैं और उन्हें राज्य मंत्री का दर्जा हासिल है। इस विषय पर पटवा ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से चर्चा करने की बात कही।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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