स्वदेश लौटना चाहते हैं किर्गिस्तान में फंसे भारतीय छात्र

ओश से जहीर खान नाम के एक भारतीय छात्र ने टाइम्स नाउ चैनल को फोन पर बताया, "किसी भी छात्र की मौत किसी भी क्षण हो सकती है।"

जहीर ने बताया कि हिंसा की वजह से भारतीय छात्र घरों तक ही सिमटे हुए हैं।

अमृत दास नाम के एक अन्य छात्र ने बताया, "मेरे घर के साथ वाली इमारत जल रही है। हम लोग अपने घर में फंसे हुए हैं।" सड़कों पर झड़पों की वजह से छात्र अपने घरों को लौटने के लिए हवाई अड्डे भी नहीं पहुंच सकते।

जलालाबाद में पढ़ने वाली सुमिता ने बताया कि छात्रों के पास खर्च करने को पैसे भी नहीं बचे हैं।

छात्रों ने शिकायत की है कि अधिकारियों ने उनसे अपने घरों को अंदर से बंद रखने को कहा है। कुछ छात्रों का कहना है कि बिजली, पानी और घरेलू गैस की आपूर्ति बंद कर दी गई है।

मीडिया की खबरों के मुताबिक किर्गिस्तान में फैली जातीय हिंसा में कम से कम 80 लोग मारे गए हैं जबकि 1,000 से अधिक घायल हुए हैं।

किर्गिस्तान की अंतरिम सरकार ने पूरे जलालाबाद क्षेत्र में कर्फ्यू लगा दिया है।

किर्गिस्तान की अांतरिक सरकार ने शनिवार को एक आदेश पारित करते हुए पुलिस और सुरक्षा बलों को दंगों पर काबू पाने के लिए दंगाइयों को देखते ही गोली मारने का हुक्म दे दिया।

दुकाने और बाजार बंद रहने से खाद्यान्नों और दवाओं की किल्लत से दक्षिणी किर्गिस्तान में मानवीय स्थिति जटिल हो गई है।

सामूहिक सुरक्षा संधि संगठन (सीएसटीओ) के अधिकारियों की सोमवार को बैठक होगी। जिसमें संकट को सुलझाने के तरीकों और हिंसा प्रभावित किर्गिस्तान में शांति रक्षक सेना की तैनाती की संभावना पर विचार किया जाएगा।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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