नक्सलियों के विरुद्ध सेना के इस्तेमाल पर फैसला टला (लीड-1)
सुरक्षा मामले पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक के बाद एक अधिकारी ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर कहा, "केंद्रीय मंत्रिमंडल किसी नतीजे पर नहीं पहुंचा। बैठक अनिर्णीत रही।"
अधिकारी ने बताया कि नक्सलियों के विरुद्ध अभियान में सेना को लगाने के मुद्दे पर गृहमंत्री व रक्षामंत्री के बीच गहरा मतभेद उभर कर सामने आया।
गृह मंत्री पी. चिदंबरम चाहते हैं कि सेना का इस्तेमाल अर्धसैनिक बलों, पुलिस की कार्रवाई के साथ-साथ हो। लेकिन रक्षा मंत्री ए.के. एंटनी ने इस विचार का यह कहते हुए विरोध किया कि सेना का इस्तेमाल अंतिम उपाय के रूप में किया जाना चाहिए।
प्रणब मुखर्जी भी इस बैठक में शामिल हुए।
सूत्रों के मुताबिक गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने सुझाव दिया कि संबंधित राज्य के मुख्यमंत्री को एकीकृत क्षेत्रीय कमान के नेतृत्व की जिम्मेदारी सौंपी जाए और भारतीय सेना के मेजर जनरल को उनका सलाहकार नियुक्त किया जाए।
सेना ने हालांकि इस पर यह करते हुए आपत्ति जताई कि मेजर जनरल वरिष्ठतम पदों में से है और ऐसे में उसका मुख्यमंत्री को रिपोर्ट करना पदानुक्रम के हिसाब से उचित नहीं होगा।
सूत्रों के अनुसार सेना ने नक्सलियों के विरुद्ध शस्त्रभेदी अभियान चलाने का यह तर्क देते हुए विरोध किया कि उनका फैलाव बड़े इलाके तक होगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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