भोपाल गैस त्रासदी : जीओएम का गठन, उच्च न्यायालय जाएगी प्रदेश सरकार (राउंडअप)

इस बीच केंद्र सरकार ने यूनियन कार्बाइड के चेयरमैन वारेन एंडरसन के प्रत्यर्पण के लिए नए सिरे से कोशिश करने का संकेत दिया है। विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, "विदेश मंत्रालय ने जांच एजेंसियों से अतिरिक्त सबूत मुहैया कराने के लिए कहा है।"

उन्होंने कहा, "विदेश मंत्रालय और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के बीच किसी तरह का गतिरोध नहीं है। सरकार इस मसले पर सामूहिक दृष्टिकोण अपनाएगी और एजेंसियों से मशविरे के बाद अगला कदम बढ़ाया जाएगा।"

अधिकारी ने यह टिप्पणी पूर्व सीबीआई अधिकारी बी.आर. लाल के उस बयान के बाद की जिसमें उन्होंने कहा था कि भोपाल गैस कांड की जांच के दौरान विदेश मंत्रालय ने एजेंसी से कहा था कि एंडरसन के खिलाफ मुकदमा न चलाएं। जांच एजेंसियों ने एंडरसन को भोपाल की अदालत में आपराधिक लापरवाही और अन्य आरोपों के तहत अभियुक्त बनाया था।

मंत्रालय के अधिकरी ने कहा कि इस संबंध में आखिरी बार 2008 में प्रत्यर्पण का आवेदन दिया गया था।

इधर, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम की अध्यक्षता में जीओएम का पुनर्गठन किया है, जिसमें स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद, कानून मंत्री एम. वीरप्पा मोइली, शहरी विकास मंत्री एस. जयपाल रेड्डी, सड़क परिवहन मंत्री कमलनाथ, आवास मंत्री कुमारी सैलजा और उर्वरक मंत्री एम. के. अझागिरी सदस्य होंगे। मूल रूप से इस जीओएम का गठन 2008 में ही किया गया था।

पर्यावरण राज्य मंत्री जयराम रमेश और विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री पृथ्वीराज चव्हाण भी सदस्य होंगे जबकि मध्य प्रदेश सरकार भोपाल गैस त्रासदी राहत और पुनर्वास विभाग के मंत्री स्थाई आमंत्रित सदस्य होंगे।

यह समूह भोपाल गैस त्रासदी से जुड़े हर मामले का परीक्षण करेगा और वह चिकित्सा सहायता के बारे में उपयुक्त सलाह देगा।

उधर, फैसले की समीक्षा और इसे उच्च न्यायालय में चुनौती देने के लिए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पांच सदस्यीय समिति गठित करने की घोषणा की है।

चौहान द्वारा सीजेएम न्यायालय के फैसले की चुनौती देने के लिए बनाई गई पांच सदस्यीय समिति में विवेक तन्खा, आर. डी. जैन, ए. के. मिश्रा, आनंद मोहन माथुर और शांति लाल लोढा शामिल हैं। यह समिति न्यायालय के फैसले की समीक्षा के बाद 10 दिन में प्रारंभिक रिपोर्ट दे देगी, जबकि 30 दिन में कानूनी पक्ष निर्धारित करते हुए यह बताएगी कि फैसले को किस तरह चुनौती दी जाए।

इस बीच अमेरिकी कांग्रेस के एक प्रभावी सदस्य और 'भारतीय अमेरिकी लॉबी' के संस्थापक फ्रैंक पैलोन जूनियर ने कहा है कि वर्ष 1984 की इस औद्योगिक त्रासदी के लिए जिम्मेदार वारेन एंडरसन और अन्य अमेरिकियों को भारत को प्रत्यर्पित कर देना चाहिए।

पैलोन ने कहा कि यूनियन कार्बाइड कंपनी के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी वारेन एंडरसन 20 हजार से अधिक लोगों की मौत का जिम्मेदार है। यह आदमी अमेरिका में रहता है और इसे अभी भी न्याय के कटघरे में खड़ा किया जाना है।

उन्होंने कहा, "दुनिया की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक भोपाल गैस कांड के लिए जिम्मेदारों को केवल दो-दो साल की सजा अपमानजनक है। इस त्रासदी के लिए वारेन एंडरसन सहित जो लोग जिम्मेदार हैं उनके खिलाफ भारत में मुकदमा चलना चाहिए और उन्हें ऐसी सजा मिलनी चाहिए जो इस त्रासदी के पीड़ितों की दर्द को बयां करे।"

पैलोन ने कहा, "वारेन एंडरसन को निश्चित तौर पर भारत को सौंपना चाहिए और उसके अपराधों की सजा मिलनी चाहिए।"

भोपाल में 25 साल पहले हुए गैस हादसे पर 23 साल से मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में चल रहे प्रकरण पर सोमवार को फैसला आया था। इस फैसले में सात आरोपियों को दो-दो साल की कैद और एक-एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। साथ ही कंपनी यूनियन कार्बाइड इंडिया पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इस फैसले को लेकर पिछले दो दिनों में खासी तीखी प्रतिक्रिया हुई है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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