भोपाल गैस त्रासदी : प्रदेश सरकार फैसले को नहीं दे सकती चुनौती!
राणा अजीत और संदीप पौराणिक
नई दिल्ली/भोपाल, 9 जून (आईएएनएस)। भोपाल गैस त्रासदी मामले में अदालती फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय जाने का मध्य प्रदेश सरकार का निर्णय न्यायालय के दरवाजे तक पहुंचने से पहले ही विफल होता दिख रहा है।
दरअसल, सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में अपने एक फैसले में कहा कि जिस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) करता है उसे मामले में निचली अदालत के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार अपील दायर नहीं कर सकती।
तीन दिसंबर 1984 को भोपाल के हनुमान गंज पुलिस थाने में इस त्रासदी की प्राथमिकी दर्ज होने के दिन से सीबीआई इसकी जांच कर रही है।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को इस मामले में स्थानीय अदालत के फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने का निर्णय सुनाया और इसके लिए एक पांच सदस्यीय समिति का गठन भी किया, जो 30 दिनों के भीतर आवश्यक कदम उठाएगी।
चौहान ने कहा, "भोपाल की जनता इस त्रासदी से पीड़ित हुई थी और राज्य सरकार उनका प्रतिनिधित्व करती है, इसलिए हमने पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए अपील करने का फैसला किया है।"
लेकिन चौहान की इस कोशिश में एक कानूनी पेच है। सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व प्रधान न्यायाधीश के. जी. बालाकृष्णन की अध्यक्षता वाली एक खंडपीठ ने एक अप्रैल को फैसला दिया था कि सीबीआई द्वारा जांच किए गए मामले में आए फैसले के खिलाफ राज्य सरकार अपील नहीं कर सकती।
खंडपीठ ने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और उनकी पत्नी राबड़ी देवी के मामले में यह फैसला दिया था। पटना उच्च न्यायालय ने भ्रष्टचार के एक मामले में इन दोनों को बरी कर दिया। इस मामले की जांच सीबीआई कर रही थी। पटना उच्च न्यायालय के फैसले को बिहार सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी थी।
न्यायाधीश आर. एम. लोढ़ा और न्यायाधीश बी. एस. चौहान की सदस्यता वाली खंडपीठ ने कहा, "पटना उच्च न्यायालय के समक्ष राज्य सरकार द्वारा की गई अपील को खारिज किया जाता है क्योंकि वह स्वीकार किए जाने योग्य नहीं है।"
सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि एक केंद्रीय कानून द्वारा स्थापित एजेंसी द्वारा जांच किए गए मामले में अदालती फैसले के खिलाफ केवल केंद्र सरकार ही अपील कर सकती है।
खंडपीठ ने कहा, "केंद्रीय कानून के तहत आपराधिक मामले की जांच की हकदार सीबीआई या कोई अन्य एजेंसी किसी मामले की जांच करती है तो केवल केंद्र सरकार लोक अभियोजक को उच्च न्यायालय में अपील दायर करने का आदेश दे सकती है।"
यद्यपि, भोपाल में आईएएनएस से बातचीत में इस मामले को उच्च न्यायालय तक ले जाने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा बनाई गई पांच समिति के सदस्य व वरिष्ठ वकील शांति लाल लोढ़ा ने कहा कि संविधान के अनुसार हर नागरिक को आपराधिक मामले में विशेष अपील का अधिकार है। उन्होंने कहा कि पांच सदस्यीय समिति मामले का अध्ययन करेगी।
सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के संदर्भ में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि हर फैसले का दायरा व्यापक होता है और समिति के सदस्य इस पर विचार करेंगे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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