एंडरसन के प्रत्यर्पण के लिए सबूत जुटा रही सरकार

विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, "विदेश मंत्रालय ने जांच एजेंसियों से अतिरिक्त सबूत मुहैया कराने के लिए कहा है।"

उन्होंने कहा, "विदेश मंत्रालय और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के बीच किसी तरह का गतिरोध नहीं है। सरकार इस मसले पर सामूहिक दृष्टिकोण अपनाएगी और एजेंसियों से मशविरे के बाद अगला कदम बढ़ाया जाएगा।"

अधिकारी ने यह टिप्पणी पूर्व सीबीआई अधिकारी बी.आर. लाल के उस बयान के बाद की जिसमें उन्होंने कहा था कि भोपाल गैस कांड की जांच के दौरान विदेश मंत्रालय ने एजेंसी से कहा था कि एंडरसन के खिलाफ मुकदमा न चलाएं।

जांच एजेंसियों ने एंडरसन के खिलाफ भोपाल की अदालत में आपराधिक लापरवाही और अन्य आरोपों के तहत अभियुक्त बनाया था।

पुलिस ने इस संबंध में 3 दिसंबर 1984 को भोपाल के हनुमानगंज पुलिस थाने में मामला दर्ज कराया था। इसके बाद 7 दिसंबर 1984 को एंडरसन और उसके कुछ सहयोगियों को भोपाल में गिरफ्तार कर लिया गया था।

एंडरसन के खिलाफ गैर इरादतन हत्या के आरोप के साथ ही विषैली गैस के लीक होने से हुई हजारों लोगों की मौत का आरोपी बनाया गया था। लेकिन उसे उसी दिन जमानत दे दी गई थी।

भोपाल की अदालत ने 1 जनवरी 1992 को एंडरसन को अदालत में पेश करने का निर्देश दिया था। इस संबंध में वाशिंगटन पोस्ट में भी सूचना प्रकाशित की गई थी।

एंडरसन के खिलाफ गैरजमानती गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद केंद्र सरकार ने उसके प्रत्यर्पण की कार्रवाई शुरू की थी।

केंद्र सरकार ने मई-जून 2003 को अमेरिकी न्याय विभाग को एंडरसन के प्रत्यर्पण संबंधी आवेदन भेजा था जिसे 2004 में खारिज कर दिया गया।

मंत्रालय के अधिकरी ने कहा कि इस संबंध में आखिरी बार 2008 में प्रत्यर्पण का आवेदन दिया गया था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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